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दिल्ली में ऐसे बन रही हैं सुरंग, देखी आपने?

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संगीत के क्षेत्र में प्रचलित फ्यूजन (जैसे पाश्चात्य और भारतीय संगीत का मिश्रण) की तर्ज पर दिल्ली मेट्रो ने तकनीक का फ्यूजन कर अपना अटका काम निकाला। बॉटेनिकल गार्डन से जनकपुरी वेस्ट के बीच कालकाजी इंटरचेंज मेट्रो स्टेशन में मेट्रो को पारंपरिक और नई तकनीक के मिश्रण से काम करना पड़ा।
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कश्मीरी गेट से फरीदाबाद जाने वाली वायलेट लाइन पर दो पिलर की चौड़ाई कम होने से अड़चन आ रही थी इसलिए पांरपरिक न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड (एनएटीएम) से टनल का निर्माण किया जा रहा है। इंजीनियर पुरानी तकनीक की मशीनों से 176 मीटर लंबी सुरंग खोदकर अप एंड डाउन ट्रैक तैयार करेंगे।

डीएमआरसी ने पत्रकारों को टनल निर्माण की जानकारी दी। डीएमआरसी केइतिहास में यह पहली बार है, जब अत्याधुनिक तकनीक होने के बावजूद अस्सी के दशक की तकनीक से टनल बनाने की जरूरत पड़ी। दिल्ली मेट्रो ने इसके निर्माण में पारंपरिक तकनीक का सहारा लिया, लेकिन उसमें मजबूती लाने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया गया।
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हमारी टीम ने इसका पूरा वीडियो तैयार किया है, खबर के आखिरी पन्ने पर देखिए।
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खुदाई के दौरान अपनाई जाती है गजब की तकनीक

अरावली रेंज होने के चलते मिट्टी में पत्थर और नमी थी। पुरानी तकनीक से सुरंग खोदने के दौरान मिट्टी का बहाव रोकने के लिए स्वीडन और आस्ट्रेलिया से स्पेशल बोल्ट मंगवाए गए हैं, जिन्हें सेल्फ ड्रीबेन रॉक बोल्ट (एसडीआरबी) कहा जाता है, जोकि बेहद महंगे हैं।

इन बोल्ट को ड्रिलिंग मशीन से खुदाई के दौरान ऊपर (छत) में लगाया जाता है। उसके बाद लोहे की राड से जाल तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि एक-एक मीटर की दूरी तय करने के बाद जमीन के अंदर आगे सुरंग की खुदाई शुरू होती है, ताकि मिट्टी न गिरे। सुरंग की खुदाई और डिजाइन घोड़े के पैर के आकार का है।

डीएमआरसी कम्युनिकेशन के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुज दयाल ने बताया कि फरीदाबाद लाइन पर कालकाजी मेट्रो स्टेशन से पहले पिलर नंबर 135 व 136 के बीच की चौड़ाई महज 28 मीटर है, जबकि टनल बोरिंग मशीन का प्रयोग करने के लिए 35-40 मीटर के बीच चौड़ाई होनी चाहिए। इसलिए यहां पारंपरिक तकनीक अपनाई गई। दूसरा बड़ा कारण बदरपुर लाइन के ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन होना है, क्योंकि जगह की चौड़ाई कम होने से संचालित ट्रैक में दरार आने का खतरा था।
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ये रही खुदाई की वीडियो

कालकाजी मेट्रो स्टेशन इंटरचेंज होगा, जहां बॉटेनिकल गार्डन, नोएडा से जनकपुरी और कश्मीरी गेट से फरीदाबाद की लाइन का क्रॉस होगा। फरीदाबाद लाइन जहां एलिवेटेड है, वहीं बॉटेनिकल गार्डन वाली अंडरग्राउंड। दोनों स्टेशनों को जोड़ने के लिए 2600 मीटर लंबा फुटओवर ब्रिज बनाया जाएगा। सिर्फ इंटरचेंज करने वाले यात्री ही इस ब्रिज का इस्तेमाल कर सकेंगे। फुटओवर ब्रिज में एस्केलेटर भी लगे होंगे।

नेहरू प्लेस के यात्रियों को तीन गेटों से एंट्री
कालकाजी मेट्रो स्टेशन पर जाने के लिए पहले ही यात्रियों को दो गेट उपलब्ध हैं। इंटरचेंज बनने के बाद नेहरू प्लेस की ओर से आने वाले यात्री तीन गेटों से आ-जा सकेंगे। एक गेट नेहरू प्लेस डीटीसी बस स्टॉप, दूसरा फायर ब्रिगेड तो तीसरा कालकाजी की ओर खुलेगा।

आग से सुरक्षा करेगी दीवार
बेशक एक सुरंग के अंदर एक साथ दो ट्रैक तैयार होंगे, लेकिन हादसों को रोकने के लिए उनके बीच एक दीवार बनाई जाएगी। बताया गया है कि जब दो ट्रेन एक साथ क्रॉस करेंगी तो पहिये और ट्रैक में रगड़ से चिनगारियां निकलती हैं, जो ट्रेन में आग लगने का कारण बन सकती हैं। इसी के मद्देनजर दोनों ट्रैक के बीच दीवार बनाने का निर्णय लिया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु
जनकपुरी-बॉटेनिकल गार्डन 36.28 किमी लंबा कॉरिडोर मार्च 2016 में खुलेगा।
21.65 किमी लाइन अंडरग्राउंड, वहीं 14.7 किमी लाइन एलिवेटेड होगी।
15 अंडरग्राउंड और 10 एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन होंगे इस लाइन पर
176 मीटर लंबी टनल होगी कालकाजी मंदिर से ओखला मेट्रो स्टेशन के बीच।
158 मीटर खुदाई का काम पूरा हो चुका है।

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