नई व्यवस्था के तहत ऐसे कैमरे लगाए जाएंगे, जो ट्रैक पर किसी व्यक्ति के आने, लावारिस वस्तु, ज्यादा भीड़ या कतार, कैमरे से छेड़छाड़, किसी व्यक्ति के लंबे समय तक एक जगह रहने और ट्रेन नहीं होने पर ट्रैक पार करने जैसी गतिविधियों को पहचान सकेंगे।
दिल्ली मेट्रो में अब सीसीटीवी कैमरे सिर्फ घटनाओं की रिकॉर्डिंग नहीं करेंगे, बल्कि संदिग्ध और असामान्य गतिविधियों को पहचानने में भी मदद करेंगे। डीएमआरसी ने लाइन-1, 3 और 4 के 76 स्टेशनों, डिपो, ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) और बैकअप कंट्रोल सेंटर (बीसीसी) में एनालॉग सीसीटीवी व्यवस्था को आईपी आधारित सिस्टम में बदलने की योजना बनाई है।
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नई व्यवस्था के तहत ऐसे कैमरे लगाए जाएंगे, जो ट्रैक पर किसी व्यक्ति के आने, लावारिस वस्तु, ज्यादा भीड़ या कतार, कैमरे से छेड़छाड़, किसी व्यक्ति के लंबे समय तक एक जगह रहने और ट्रेन नहीं होने पर ट्रैक पार करने जैसी गतिविधियों को पहचान सकेंगे। 76 स्टेशनों पर बदलेगी निगरानी व्यवस्था।
खास बात यह है कि कैमरों में असामान्य गतिविधि पहचानने की सुविधा भी होगी। इसके तहत कैमरा सामान्य गतिविधियों के पैटर्न को सीखकर उससे अलग होने वाली हरकत को पहचान सकेगा। डीएमआरसी के दस्तावेज के मुताबिक, संबंधित स्टेशनों और अन्य परिसरों में फिलहाल 2531 एनालॉग कैमरे लगे हैं। नई व्यवस्था में 3997 कैमरों का प्रावधान किया गया है।
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इनमें 2970 पांच मेगापिक्सल बुलेट कैमरे, 785 फिक्स्ड डोम कैमरे और 242 पीटीजेड कैमरे शामिल हैं। इससे कैमरों की संख्या के साथ निगरानी का दायरा भी बढ़ेगा। नए बुलेट कैमरों के लिए कम रोशनी में बेहतर रिकॉर्डिंग, वाइड डायनेमिक रेंज और पांच मेगापिक्सल या उससे बेहतर रिजॉल्यूशन जैसी तकनीकी क्षमताएं निर्धारित की गई हैं।
कैमरे बताएंगे कहां बढ़ रही भीड़
कैमरों में ओवरक्राउडिंग और अत्यधिक कतार की गिनती करने की सुविधा होगी। इसका इस्तेमाल स्टेशन के उन हिस्सों में खास तौर पर उपयोगी होगा, जहां यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। कैमरा ऐसी स्थिति की पहचान कर निगरानी प्रणाली में अलर्ट उपलब्ध कराने में मदद करेगा। तकनीकी दस्तावेज में अलग-अलग तरह की गतिविधियों की पहचान के लिए एक साथ कई एनालिटिक्स चलाने की क्षमता का भी प्रावधान है।