फेज-4 के तीन प्रोजेक्ट पर मंजूरी का इंतजार
दिल्ली मेट्रो फेज-4 के तीन कॉरिडोर (एयरोसिटी-तुगलकाबाद, जनकपुरी पश्चिम-आरके आश्रम और मौजपुर-मजलिस पार्क) पर फिलहाल निर्माण चल रहा है। जबकि तीन शेष कॉरिडोर पर अभी तक केंद्र से मंजूरी नहीं मिली है। इनमें इंद्रप्रस्थ -इंद्रलोक (12.37 कि.मी), लाजपत नगर-साकेत जी ब्लॉक( 8.38 कि.मी.) और रिठाला-बवाना-नरेला(22.91) के बीच करीब 40 किलोमीटर के दायरे में तीन कॉरिडोर तैयार होंगे। यात्रियों की कम संख्या और सामान्य मेट्रो से 40 फीसदी कम खर्च को देखते हुए रिठाला-नरेला लाइन पर मेट्रोलाइट की योजना थी। लेकिन अब इसको बदला जा रहा है।
टीओडी से बढ़ेंगी सहूलियत
ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपेमेंट (टीओडी) के तहत वाणिज्यिक, रिहायशी सुविधाएं आसपास होती हैं। इससे लोगों को कम से कम परिवहन साधनों का इस्तेमाल कर भी गंतव्य तक पहुंच की सुविधा मुहैया की जाती है। मेट्रो सेवाएं शुरू होने से लोगों को अपने घरों के नजदीक मेट्रो, मेट्रो स्टेशन से काफी कम दूरी पर फैक्ट्री, दफ्तर, मॉल्स, बाजार, अस्प्ताल जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इस क्षेत्र में चल रही निर्माण गतिविधियां और आगामी परियोजनाओं को देखते हुए मेट्रो सेवा की शुरुआत से रोजाना लाखों यात्रियों की सहूलियतें बढ़ जाएंगी। गंतव्य तक कम वक्त में बगैर परेशानी पहुंच सकेंगे। सरकार भी एजेंसियों के साथ मिलकर टीओडी परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है।
कम आबादी वाले क्षेत्रों के लिए है मुफीद
कम आबादी वाले क्षेत्रों के लिए मेट्रोलाइट एक हल्की मेट्रो है। इसमें कोच की संख्या कम होती है और सड़क के साथ साथ बने हुए ट्रैक पर चलती हैं। कम दूरी और कोच कम होने के कारण इसमें यात्रियों की क्षमता भी कम होती है। अलग ट्रैक पर चलने के कारण यात्रियों को न तो ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ता और न ही गंतव्य तक पहुंचने में देरी होती है। मेट्रोलाइट की रफ्तार भी 50-60 कि.मी प्रति घंटे के करीब होती है और इसे फीडर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।