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तो ऐसे होंगे दिल्ली के लोकसभा चुनाव परिणाम!

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दिल्ली में सुरक्षित सीटों पर आम आदमी पार्टी का जादू कायम है। दिल्ली के मतदान ट्रेंड के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सबसे अधिक मतदान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी विधानसभा सीट पर 71.83 फीसदी हुआ है।
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यह सुरक्षित और अरविंद केजरीवाल के प्रभाव वाली सीट है। विस चुनाव में भी इस सीट पर सबसे अधिक 72.12 फीसदी मतदान हुआ था।

यहां तो बीजेपी ने मारी बाजी!

मध्य आय वर्ग (मिडिल क्लास) मतदाताओं में मोदी का जादू चला है। दिल्ली की एक दर्जन सुरक्षित विधानसभा सीटों पर मतदान प्रतिशत सामान्य से अधिक रहने के साथ ही मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली सीटों पर भी अधिक मतदान हुआ है। इसे मोदी का असर माना जा रहा है।

त्रिलोकपुरी और गोकलपुर में भी 70 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है। इसमें एक विधानसभा सीट भाजपा के पास है। वहीं एकमात्र सुरक्षित सीट ऐसी है, जिसमें औसत से कम मतदान हुआ है। उत्तर पश्चिम सुरक्षित लोस सीट पर औसत मतदान 61.66 हुआ है जबकि इस सीट पर महज 59 फीसदी मतदाताओं ने वोट किया है।

कांग्रेस का सूपड़ा साफ!

भले रहस्य का विषय बने मुस्लिम वोटर्स को कांग्रेस अपने पक्ष में मान रही हो, लेकिन असल में कई महत्वपूर्व सीटों पर आम आदमी पार्टी मुस्लिम वोटर्स को रिझाने में कामयाब रही है।

हाल ही हुए कर्बला विवाद में कांग्रेस के अहमद पटेल की गिरफ्तारी न होने और कठपु‌तली कॉलोनी विवाद में आम आदमी पार्टी का अप्रोच कांग्रेस से उनके मुस्लिम वोटर्स छीन लिए। रही सही उम्मीद कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स की तो इस बार की बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है।

यहां से अभी नहीं उठा पर्दा!

मुस्लिम बहुल सीटों मतदान प्रतिशत में गिरावट मुस्लिम मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बने रहने से जोड़कर देखा जा रहा है।

दिल्ली में सत्तर फीसदी से अधिक मतदान वाली सीटों में चांदनी चौक लोस की शकूरबस्ती, त्रिनगर और सदर बाजार, उत्तर पूर्वी दिल्ली लोस में सीमापुरी, गोकलपुर, पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर त्रिलोकपुरी और पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट में जनकपुरी शामिल है।
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इन्हें हुआ है असली फायदा!

चांदनी चौक के मुस्लिम बहुल बल्लीमारान, उत्तर पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर, पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में औसत से कम मतदान को सीधे तौर पर कांग्रेस के लिए नुकसानदेह माना जा रहा है। वहीं दिल्ली कैंट में महज 58.18 फीसदी मतदान को सरकारी नौकरी करने वालों में ‘आप’ की लोकप्रियता घटने का संकेत माना जा रहा है।

दक्षिण दिल्ली सीट पर भाजपा का दस में से सात विस पर कब्जा है और ‘आप’ के पास तीन सीटें हैं। यहां औसत मतदान 63 फीसदी हुआ है, जबकि भाजपा के कब्जे वाली सात में से पांच सीटों पर मतदान 60 से 62 फीसदी के बीच रहा है। वहीं ‘आप’ के विधायकों वाली तीन सीट पर मतदान 64-69 फीसदी के बीच रहा है।

इसे सीधे तौर पर ‘आप’ प्रत्याशी कर्नल देवेन्द्र सहरावत की बढ़त से जोड़कर देखा जा रहा है। जबकि भाजपा के प्रत्याशी रमेश बिधूड़ी जिस तुगलकाबाद सीट से विधायक हैं, वहां भी मतदान औसत से थोड़ा कम ही हुआ है।
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