उच्च न्यायालय ने कथित दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति घोटाले के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज किए गए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को बुधवार को जमानत देने से इनकार कर दिया।
न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा ने संजय सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत को मुकदमे में तेजी लाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। हम ट्रायल कोर्ट को सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश देते हैं। किसी भी पक्ष द्वारा अनावश्यक स्थगन की मांग नहीं की जाएगी। सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 4 अक्टूबर, 2023 को उनके आवास पर तलाशी के बाद गिरफ्तार किया था। वह 13 अक्टूबर, 2023 से न्यायिक हिरासत में हैं। ट्रायल कोर्ट ने 22 दिसंबर, 2023 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
सिंह के खिलाफ मामले में यह आरोप शामिल है कि उन्होंने अब खत्म हो चुकी दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति को तैयार करने और लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर कुछ शराब निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को लाभ पहुंचाना था।
इससे पहले संजय सिंह ने अपनी गिरफ्तारी को इस आधार पर चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी कि यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है और पंकज बंसल बनाम भारत संघ, जिसे एम3एम रियलिटी मामले के रूप में जाना जाता है में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है।
उच्च न्यायालय ने 20 अक्टूबर, 2023 को उस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि ईडी एक प्रमुख जांच एजेंसी है और इसमें राजनीतिक उद्देश्यों को शामिल करने से देश की छवि पर असर पड़ सकता है। इसके बाद सिंह ने इस पहलू पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जब वह मामला 20 नवंबर, 2023 को शीर्ष अदालत के समक्ष सुनवाई के लिए आया, तो शीर्ष अदालत ने उन्हें जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी। मुकदमे में उनकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय के समक्ष वर्तमान याचिका दायर की थी।
दिल्ली शराब नीति मामले में आप सांसद संजय सिंह फिलहाल जेल में हैं। संजय सिंह को उत्पाद नीति घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार अक्तूबर को गिरफ्तार किया था। ईडी ने आरोप लगाया है कि संजय सिंह ने अब समाप्त हो चुकी उत्पाद शुल्क नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे कुछ शराब निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को मौद्रिक लाभ हुआ।