चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ एक बार फिर उपराज्यपाल वीके सक्सेना और दिल्ली सरकार आमने-सामने हैं। इस बार मसला प्रदूषण का है। आबोहवा साफ करने के दिल्ली सरकार के इंतजामों से नाखुशी जताते हुए उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। बकौल उपराज्यपाल, अगर मुख्यमंत्री कोई ठोस कदम नहीं उठाते तो वह दिल्ली वालों के लिए मूकदर्शक नहीं बन सकते। उधर, आम आदमी पार्टी ने उपराज्यपाल के पत्र पर नाराजगी जताते हुए भाषा को आपत्तिजनक करार दिया है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उपराज्यपाल ने लिखा है कि 2022 में दिल्ली दुनिया की दूसरी सबसे प्रदूषित राजधानी थी। आपकी सरकार के नौ वर्षों का यह रिपोर्ट कार्ड ऐसा नहीं है, जिस पर आपको गर्व होगा। आपका बहुचर्चित दिल्ली मॉडल धुंध में डूबा हुआ है। उन्होंने नवंबर 2022 और अक्तूबर 2023 में दिल्ली के साथ और पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे को उठाया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2023 में इसी तस्वीर को सामने रखा गया है। दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर गंभीर खतरा है।
उपराज्यपाल ने इसकी वजह गिनाते हुए कहा है कि इसके संपर्क में रहने से व्यक्ति की मौत तक हो जाती है। हर साल सर्दियों का प्रदूषण दिल्ली सरकार के उदासीन रवैये को दर्शाता है। हालात इतने विषम हो जाते हैं कि स्कूल और दफ्तर बंद करने को मजबूर होना पड़ता है, जबकि दिल्ली सरकार के मंत्री आपातकालीन उपायों, दिखावटी बातों के साथ मीडिया बाइट की हास्यास्पद कवायद में मुद्दे को उलझा देते हैं। अगर आपकी सरकार कोई समाधान नहीं खोज पाती तो वह खुद दिल्ली के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं। दिल्लीवालों के लिए मूकदर्शक बनकर नहीं रहा जा सकता।