दरअसल, करोल बाग की तंग गलियों में हजारों अवैध कारखाने हैं। यहां बड़ी संख्या में रामपुर के खाता नगर गांव के आस-पास के लोग काम करते हैं। एक के बाद एक अपने परिचितों व रिश्तेदारों के सहारे यह यहां पहुंचे हैं। इनमें से एक अमन भी था। वह अपने मामा उवैश के साथ यहां आया था। अमन के परिवार में मां महफूजा और एक छोटी बहन है। उसकी मां गांव में खेतों में मजदूरी करती हैं। अपने इकलौते बेटे की मौत से महफूजा का रो रो कर बुरा हाल है।
मृतक मोसिम, मुकीम और मुजीब
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हादसे में अपने दो भाईयों को गंवाने वाले मुईम फफक-फफक रोते हुए कहते हैं कि दस साल पहले बापा नगर में उनके बड़े भाई मुजीब आए थे। भाई को अकेला काम करता देख वह भाई मुकीम के साथ दो साल पहले यहां आए थे। रात में सभी भाईयों ने एक साथ खाना खाया। हादसे के वक्त धमाके की आवाज सुनाई दी। जब तक कुछ समझ पाते मकान के ऊपर का पूरा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। मलबे से आवाज आ रही थी, भाई बचा लो। वह तुरंत मलबे को हटाकर अपने भाईयों को खोजने लगे।
बाद में राहत बचाव कर रहे कर्मियों ने दोनों को बाहर निकाला। इस दौरान दोनों की सांसें चल रही थीं। शाम को अस्पताल में पता चला कि उनकी मौत हो गई। वहीं, हादसे में जान गंवाने वाला मोहसिन अपने दो भाई सनी व समीउल्हा के साथ रह रहा था। घटना के समय तीनों भाई तीसरे मंजिल पर थे।