राजधानी निवासियों को फिलहाल बिजली की दरों में बढ़ोतरी से भले ही राहत मिली हुई हो, लेकिन उनको पानी की दरों में बढ़ोतरी का झटका झेलना पड़ सकता है। क्योंकि पानी की दरों में बढ़ोतरी के लिए दिल्ली जल बोर्ड को किसी से भी स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं है। वह प्रतिवर्ष एक जनवरी से पानी दरों में दस प्रतिशत बढ़ोतरी कर सकता है।
दिल्ली जल बोर्ड ने एक जनवरी से पानी की दरों में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी करने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड इस कार्य को चुपचाप करना चाहता है। क्योंकि अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने के चलते जिसके चलते उसे दरे बढ़ाने से रोका जा सकता है।
जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिवर्ष कई सौ करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। उसे दूर करने के लिए प्रतिवर्ष दरों में बढ़ोतरी करने का प्रावधान किया गया है। सरकार में बैठे दल अगर दरें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है तो वे सरकार से घाटा दूर कराने के लिए अनुदान दिलवाए।
दूसरी ओर पानी की दरें बढ़ने की स्थिति में लोगों को सीवर का बिल भी अधिक देना पड़ेगा। उसका बिल पानी की दरें बढ़ने पर स्वयं ही बढ़ जाता है। दरअसल, जल बोर्ड ने पानी के बिल के साथ सीवर का बिल भी जोड़ रखा है। जल बोर्ड पानी के बिल की 60 प्रतिशत राशि सीवर के बिल के रूप में लेती है।
दिल्ली जल बोर्ड को वर्ष 2009 से प्रतिवर्ष एक जनवरी से पानी की दरों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का अधिकार मिला हुआ है। इन वर्षों के दौरान वह चार बार एक जनवरी से पानी की दरों में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी कर चुका है। इसी कड़ी में उसने एक जनवरी 2015 से पानी की दरों में बढ़ोतरी करने की तैयारी कर ली थी।