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दिल्ली विश्व का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर

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आबादी के लिहाज से राजधानी दिल्ली दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर बन गया है। पहले पायदान पर जापान की राजधानी टोक्यो है। यही नहीं, रिपोर्ट बताती है कि 2050 में भारत की शहरी आबादी चीन से ज्यादा होगी।
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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 की तुलना में दिल्ली की आबादी तेजी से बढ़ी है। राजधानी में इस समय 2.5 करोड़ लोग रहते हैं, जबकि टोक्यो का आंकड़ा 3.80 करोड़ है। 2030 तक दिल्ली की आबादी 3.60 करोड़ हो जाएगी।

इस बीच टोक्यो की आबादी में गिरावट आएगी, लेकिन उस समय वहां 3.70 करोड़ लोग होंगे। इस रिपोर्ट में मुंबई फिलहाल छठे पायदान पर है। 2030 तक मुंबई 2.80 करोड़ आबादी के साथ चौथे स्थान पर होगा। मुंबई की आबादी फिलहाल 2.10 करोड़ बताई गई है।
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चीन के मुकाबले कितनी बढ़ी भारत की आबादी?

यूएन रिपोर्ट के मुताबिक, 2014-50 के बीच विकासशील देशों की शहरी आबादी तेजी से बढ़ेगी। इनमें सबसे आगे भारत, चीन और नाइजीरिया होंगे। इस बीच भारत की शहरी आबादी में 40.4 करोड़ का इजाफा होगा, जबकि चीन की आबादी 29.20 करोड़ बढ़ेगी।

रिपोर्ट बताती है कि फिलहाल भारत की शहरी आबादी 41 करोड़ है। वहीं, चीन की मौजूदा शहरी आबादी 75.80 करोड़ है। दोनों देशों का दुनिया की शहरी आबादी में हिस्सा तीस फीसदी है।

अमेरिका, ब्राजील, इंडोनेशिया, जापान और रूस के साथ इन दोनों एशियाई देशों में विश्व की आधी से अधिक शहरी आबादी रहती है। रिपोर्ट की मानें तो फिलहाल दुनिया में 54 फीसदी लोग शहरों में रहते हैं। वहीं, 2050 तक यह हिस्सा 66 फीसदी हो जाएगा। सबसे ज्यादा इजाफा अफ्रीका और एशिया में होगा।

यूएन के आंकड़े पर सवालिया निशान!

संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट 2.50 करोड़ की आबादी के साथ दिल्ली को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर बता रही हो, लेकिन दिल्ली सरकार के आंकड़े इस रिपोर्ट के हक में खड़े नजर नहीं आते। 2011 की जनगणना के आधार पर दिल्ली सरकार मौजूदा आबादी दो करोड़ से नीचे बता रही है।

वहीं, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने 2021 में दिल्ली की आबादी 2.30 करोड़ पहुंचने का अनुमान जताया है। खास बात यह कि इस मामले में दिल्ली सरकार का कोई भी अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है।

नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौजूदा समय में दिल्ली की आबादी 2.50 करोड़ नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गुड़गांव, फरीदाबाद, नोएडा अज्ञैर गाजियाबाद की शहरी आबादी भी जोड़ दी गई हो।
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ये हैं दिल्ली सरकार के आंकड़े

बताते चलें कि 2011 की जनगणना के मुताबिक राजधानी की आबादी 1,67,88,000 थी। खास बात यह कि इस दौरान जनसंख्या वृद्धि में गिरावट दर्ज की गई। 2001 की दशकीय वृद्धि 47 फीसदी की तुलना में 2011 की दशकीय वृद्धि 21.2 फीसदी रही।

दिल्ली सरकार का अनुमान है कि 2014 में दिल्ली की शहरी आबादी 1,96,23,000 होगी। जबकि 2.50 करोड़ का आंकड़ा 2023 में पार करेगा। दूसरी तरफ केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अधीन काम करने वाले दिल्ली विकास प्राधिकरण ने मास्टर प्लान-2021 में अनुमान लगाया गया है कि 2021 में दिल्ली की आबादी 2.30 करोड़ होगी।

2007 में तैयार इस मास्टर प्लान में बताया गया था कि 2011 में दिल्ली की आबादी 1.82 करोड़ होगी। जबकि 2011 की जनगणना में आबादी 1.77 करोड़ ही दर्ज की गई थी। वहीं, 2017 में आबादी 1.90 करोड़ होने का अनुमान है।
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