एनजीटी चेयरपर्सन न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने दिल्ली जल बोर्ड को फरवरी माह में ही आदेश दिया था कि पूर्वी दिल्ली के नालों की सफाई पर एक्शन प्लान सौंपा जाये और जल्द से जल्द इसे पूरा किया जाये। लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हो सका है।
पीडब्ल्यूडी के पास पूरी दिल्ली में 1400 किमी सड़क क्षेत्र है। सड़क के दोनों ओर बने नालों से प्रति वर्ष औसतन दो लाख टन गाद निकलती है। एक ट्रक में 12 टन गाद आती है।
इसे फेंकने के लिए भी उसे नगर निगमों को मूल्य चुकाना पड़ता है। पूर्वी दिल्ली सहित अनेक इलाकों में सड़क किनारे से अब तक गाद निकालने का काम किया जा रहा है।
अगर समय से बारिश आती है तो इस काम में बड़ी बाधा आने वाली है। गाद न निकलने के कारण सड़कों पर जल भराव हो सकता है।
भाजपा नेता जय प्रकाश के मुताबिक़ उत्तरी जोन के 559 नालों में सफाई का काम पूरा किया जा रहा है। इस समय कम मानव क्षमता के साथ सफाई का काम करना पड़ रहा है, जिसके कारण अभी तक सफाई का काम प्रभावित हुआ है। लेकिन इसी हफ्ते यह काम पूरा हो जाने की उम्मीद है।
दिल्ली में प्रति दिन लगभग 9500 मीट्रिक टन कचरा निकलता है जिसे भलस्वा, गाजीपुर और ओखला के लैंड फिल साइट्स पर डाला जाता है। 52 एकड़ में फैली भलस्वा लैंडफिल साइट भी अब लगातार ऊंची होती जा रही है, जो आने वाले समय में बड़ी समस्या बनकर उभर सकती है।
विशेषज्ञों ने 2006 में ही इसकी कूड़ा वहन क्षमता को खत्म करार दे दिया था, लेकिन किसी अन्य जगह की कमी के अभाव में आज भी यहां कूड़ा डंप किया जा रहा है।
इस समय इसकी ऊंचाई लगभग 203 फीट तक पहुंच चुकी है।
गाजीपुर में कूड़े का पहाड़ पहले ही 213 फीट के लगभग ऊंचा होकर एक रिकॉर्ड बना चुका है। अनेक प्रयासों की घोषणा के बाद भी इसकी ऊंचाई कम करने का कोई जमीनी प्रयास अभी तक नहीं हो सका है।