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इस बार फिर बारिश में डूबने के लिए तैयार है दिल्ली, एनजीटी के आदेश को रखा ताक पर!

Tue, 23 Jun 2020 06:52 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • बारिश का मौसम आ जाने के बाद भी अभी तक पूरा नहीं हो पाया है नालों से गाद निकालने का काम, पीडब्ल्यूडी विभाग सबसे पीछे           
  • 15 जून तक नालों की सफाई की डेड लाइन हो चुकी पार, 25 जून को बारिश की संभावना
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नाला - फोटो : अमर उजाला (सांकेतिक)
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विस्तार
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दिल्ली में अगले दो दिनों के भीतर बारिश आने की संभावना व्यक्त की जा रही है, लेकिन अभी तक नालों की सफाई का काम पूरा नहीं हो पाया है। गाद निकालने के काम में पीडब्ल्यूडी विभाग सबसे पीछे है, जबकि दिल्ली की लगभग 1400 किमी सड़कों के किनारे दोनों ओर के नालों से गाद निकालने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उसी की है।

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यानी नाले अभी भी गाद से भरे हैं और बारिश में पानी सड़कों पर भरना लगभग तय है।  

पूर्वी दिल्ली नगर निगम स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन संदीप कपूर ने बताया कि मंगलवार को भी इस मुद्दे पर नगर निगम की चेयरमैन अंजू कमलकांत की अगुवाई में दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी और डीडीए के अधिकारियों की बैठक हुई।

बैठक में यह बात सामने आई है कि कुछ जगहों पर गाद निकालने का काम बाकी रह गया है, जिसे जल्द से जल्द पूरा किये जाने के निर्देश दिए गये हैं।

पूर्वी दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत 123 किमी के नाले आते हैं। बारिश के पहले इन नालों से 50 हजार मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा गया था, निगम अब तक 55 हजार मीट्रिक टन गाद निकालकर सिंगोला की लैंडफिल साइट पर डाल चुका है।
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दिल्ली जल बोर्ड भी अपने नालों की सफाई का काम पूरा कर चुका है, जबकि पीडब्ल्यूडी का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

पीडब्ल्यूडी ने अपने हिस्से के नालों से 45 हजार मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक केवल 26 हजार टन गाद ही निकाली जा सकी है।

बाढ़ एवं सिंचाई विभाग ने भी अपना एक लाख 15 हजार टन गाद निकालने का लक्ष्य पूरा कर लिया है।

पूर्वी दिल्ली में दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले 312 नाले अभी तक पूरी तरह साफ़ नहीं हो सके हैं, जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम के 223 नालों में सफाई का काम लगभग पूरा हो चुका है।
 

एनजीटी चेयरपर्सन न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने दिल्ली जल बोर्ड को फरवरी माह में ही आदेश दिया था कि पूर्वी दिल्ली के नालों की सफाई पर एक्शन प्लान सौंपा जाये और जल्द से जल्द इसे पूरा किया जाये। लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हो सका है।    

पीडब्ल्यूडी का काम अधूरा

पीडब्ल्यूडी के पास पूरी दिल्ली में 1400 किमी सड़क क्षेत्र है। सड़क के दोनों ओर बने नालों से प्रति वर्ष औसतन दो लाख टन गाद निकलती है। एक ट्रक में 12 टन गाद आती है।

इसे फेंकने के लिए भी उसे नगर निगमों को मूल्य चुकाना पड़ता है। पूर्वी दिल्ली सहित अनेक इलाकों में सड़क किनारे से अब तक गाद निकालने का काम किया जा रहा है।

अगर समय से बारिश आती है तो इस काम में बड़ी बाधा आने वाली है। गाद न निकलने के कारण सड़कों पर जल भराव हो सकता है।  

भाजपा नेता जय प्रकाश के मुताबिक़ उत्तरी जोन के 559 नालों में सफाई का काम पूरा किया जा रहा है। इस समय कम मानव क्षमता के साथ सफाई का काम करना पड़ रहा है, जिसके कारण अभी तक सफाई का काम प्रभावित हुआ है। लेकिन इसी हफ्ते यह काम पूरा हो जाने की उम्मीद है।  

यहां जाता है कचरा

दिल्ली में प्रति दिन लगभग 9500 मीट्रिक टन कचरा निकलता है जिसे भलस्वा, गाजीपुर और ओखला के लैंड फिल साइट्स पर डाला जाता है। 52 एकड़ में फैली भलस्वा लैंडफिल साइट भी अब लगातार ऊंची होती जा रही है, जो आने वाले समय में बड़ी समस्या बनकर उभर सकती है।

विशेषज्ञों ने 2006 में ही इसकी कूड़ा वहन क्षमता को खत्म करार दे दिया था, लेकिन किसी अन्य जगह की कमी के अभाव में आज भी यहां कूड़ा डंप किया जा रहा है।

इस समय इसकी ऊंचाई लगभग 203 फीट तक पहुंच चुकी है।

गाजीपुर में कूड़े का पहाड़ पहले ही 213 फीट के लगभग ऊंचा होकर एक रिकॉर्ड बना चुका है। अनेक प्रयासों की घोषणा के बाद भी इसकी ऊंचाई कम करने का कोई जमीनी प्रयास अभी तक नहीं हो सका है।

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