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केजरीवाल के आवास पर हमला: हाईकोर्ट ने मांगा दिल्ली पुलिस से जवाब, दो हफ्ते में फाइल करनी होगी स्टेटस रिपोर्ट

Fri, 01 Apr 2022 12:42 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से दो हफ्तों के अंदर एक सील लिफाफे में केस की स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखने का आदेश दिया है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर हुए हिंसक प्रदर्शन और तोड़फोड़ मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस ने जवाब मांगा है। अदालत ने दिल्ली पुलिस से दो हफ्ते के अंदर एक सील लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट पेश करने के भी आदेश दिए हैं।

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इसके साथ ही हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी संरक्षित रखने को कहा है। यह आदेश कार्यकारी चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की बेंच तब दिया जब उन्हें यह सूचित किया गया कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की है और उसने मामले में स्वतः संज्ञान लेकर आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।

दरअसल हाईकोर्ट आप विधायक सौरभ भारद्वाज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिस दौरान यह आदेश दिया गया, जिसमें मांग की गई है कि सीएम के आवास पर हुए हमले की जांच के लिए एसआईटी गठित हो। 
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यह आदेश कार्यकारी चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की बेंच तब दिया जब उन्हें यह सूचित किया गया कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की है और उसने मामले में स्वतः संज्ञान लेकर आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।

एएसजी ने किया नोटिस जारी करने का विरोध
दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत में पेश हुए एसजी संजय जैन अदालत द्वारा जारी नोटिस का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका ही गलत धारणा पर दायर की गई है कि घटना में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुआ है। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिया है कि गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के बीच में एक बैठक इस संबंध में हो चुकी है और सीएम के सचिव से खतरे को लेकर भी बात होगी।

अदालत ने दरकिनार की एएसजी की दलीलें
हालांकि अदालत ने इस पर कहा कि यहां मुद्दा एसआईटी गठित करने का नहीं है। यह संवैधानिक पद से जुड़े शख्स का है इसलिए घटना की हर डिटेल की जानकारी होनी ही चाहिए। सुनवाई कर रही पीठ ने कहा, हमने वीडियो देखा है। वहां भीड़ अनियंत्रित थी। लोगों ने बूम बैरियर तोड़ दिए और कुछ तो गेट पर चढ़ने का भी प्रयास कर रहे थे। उन्होंने कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश की। हमने पाया कि वहां मौजूद पुलिस फोर्स अपर्याप्त व संख्या में बेहद कम थी। इसलिए आपको बताना ही पड़ेगा कि आपका क्या बंदोबस्त था। आपके पास इस घटना के होने को लेकर क्या सूचना थी। हमें ये सब देखना होगा।

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