दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी में असहाय लोगों के खाने के लिए राहत केंद्रों को पुन: शुरू करने व सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत न आने वाले गरीबों और जरूरतमंदों को सूखा राशन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी में असहाय लोगों के खाने के लिए राहत केंद्रों को पुन: शुरू करने व सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत न आने वाले गरीबों और जरूरतमंदों को सूखा राशन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने दिल्ली रोजी रोटी अधिकार अभियान संस्था द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। याची ने तर्क रखा कि लॉकडाउन के चलते सख्त प्रतिबंधों और कर्फ्यू के कारण यह जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा कि हालांकि वर्तमान में इस बार महामारी और आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत आपदा की घोषणा नहीं की गई है लेकिन लॉकडाउन के चलते गरीब लोगों के समक्ष एक बार फिर रोटी-रोजी का संकट बन गया है। लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है। ऐसे में सरकार को तुरंत इन लोगों की सहायता की जरूरत है।
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अदालत ने सरकार को याचिका में उठाए गए मुद्दों पर तुंरत विचार करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 13 मई तय कर दी। याची के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संस्था ने हालही में दिल्ली सरकार को गरीब व असहाय लोगों को शेल्टर होम व अन्य स्थानों पर रह रहे लोगों को गर्म खाना प्रदान करने के लिए पत्र लिखा था।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष भी सरकार को ऐसा आदेश दिया था ताकि लोग भूखे न रहें। वर्तमान में भी वही स्थिति आ गई है। उन्होंने कहा कि मात्र शल्टर होम में रहने वाले ही नहीं बल्कि उन लोगों को भी राशन प्रदान करने का निर्देश दिया जाए जिनके पास राशन र्काड नहीं है।