नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में बच्चों की हिरासत, पहुंच और पेरेंटिंग प्लान से संबंधित दिशानिर्देश के लिए सभी हितधारकों से परामर्श मांगा है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए। याचिका आयुष्मान इनिशिएटिव फॉर चाइल्ड राइट्स और एक अन्य संगठन ने दायर की थी, इसमें दिल्ली हाईकोर्ट और अन्य को प्रतिवादी बनाया गया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि कलकत्ता हाईकोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा पहले से तैयार किए गए दिशा निर्देशों की तर्ज पर दिल्ली में भी बाल पहुंच और हिरासत के लिए एकसमान नीति बनाई जाए। याचिका में कहा गया कि ऐसे दिशा निर्देशों की कमी से बच्चों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह के भीतर रजिस्ट्रार जनरल को विस्तृत प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) सौंपने की अनुमति दी जाती है, जिसमें याचिका से जुड़े सभी दस्तावेज शामिल हों। रजिस्ट्रार जनरल इसे उचित समिति या प्राधिकारी के समक्ष रखेंगे, जो हितधारकों से परामर्श कर नीति तैयार करने पर निर्णय लेंगे। अदालत ने कहा कि यह जनहित याचिका बाल पहुंच और हिरासत दिशा निर्देशों तथा पेरेंटिंग प्लान से जुड़ी चिंताओं को उठाती है। कलकत्ता हाईकोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऐसे दिशानिर्देश पहले ही तैयार कर लिए हैं।