हाईकोर्ट ने यह आदेश एकल जज के उस आदेश को चुनौती देने वाली समता पार्टी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें शिव सेना (उद्धव गुट) को चुनाव चिह्न के रूप में जलती मशाल मिलने के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक दल चुनाव चिह्नों को अपनी विशिष्ट संपत्ति नहीं मान सकते हैं। साथ ही कहा कि यदि पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहने पर चुनाव चिह्न के इस्तेमाल का हक भी गंवा सकते हैं।
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हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती देने वाली समता पार्टी की याचिका पर की, जिसमें शिवसेना (उद्धव गुट) को चुनाव चिह्न के रूप में जलती मशाल मिलने के खिलाफ समता पार्टी की याचिका को खारिज कर दिया गया था। समता पार्टी ने दावा किया कि जलती मशाल उसका चुनाव चिह्न है और उसने इस चिह्न पर चुनाव लड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने पूर्व में सुब्रमण्यम स्वामी बनाम केंद्रीय चुनाव आयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी जिक्र किया और कहा कि चुनाव चिह्न कोई मूर्त वस्तु नहीं है और न ही इससे कमाई होती है।
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पीठ ने कहा कि यह केवल एक प्रतीक चिह्न है, जो विशेष राजनीतिक दलों के साथ जुड़ा होता है ताकि लाखों निरक्षर मतदाताओं को विशेष दल से संबंधित अपने पसंद के उम्मीदवार को वोट करने में आसानी हो। इससे निरक्षर मतदाताओं को अपने अधिकार का उचित प्रयोग करने में मदद मिलती है।