फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi: हाईकोर्ट ने कहा- आपसी सहमति से संबंध बनाने के बाद नहीं लगा सकते दुष्कर्म का आरोप, जानें पूरा मामला

Sat, 06 Apr 2024 10:08 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सीधे तौर पर कहा कि महिला की ओर से यौन संबंध में शामिल होने के निर्णय से सीधा संबंध होना चाहिए। आपसी सहमति से संबंध बनाने के बाद दुष्कर्म का आरोप नहीं लगा सकते।
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उच्च न्यायालय ने कहा है कि जब भी कोई महिला शारीरिक संबंध बनाने के लिए तर्कसंगत विकल्प बनाती है तो सहमति को तथ्य की गलत धारणा पर आधारित नहीं कहा जा सकता, जब तक कि इस बात के स्पष्ट सबूत न हों कि शादी का झूठा वादा किया गया है। न्यायाधीश अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने दुष्कर्म के मामले को रद्द करते हुआ कहा कि वादा तत्काल प्रासंगिक होना चाहिए। महिला की ओर से यौन संबंध में शामिल होने के निर्णय से सीधा संबंध होना चाहिए। 

विज्ञापन
Trending Videos

अदालत ने कहा कि यह देखना उचित है कि जब भी कोई महिला इस तरह की कार्रवाई के परिणामों को पूरी तरह से समझने के बाद शारीरिक संबंध बनाने का तर्कसंगत विकल्प चुनती है, तो सहमति को तथ्य की गलत धारणा पर आधारित नहीं कहा जा सकता, जब तक कि इस बात का स्पष्ट सबूत न हो कि वादा करने के समय निर्माता की ओर से कोई झूठा वादा किया गया था, लेकिन उसे पूरा करने का कोई इरादा नहीं था।

न्यायाधीश मेंदीरत्ता ने महिला की ओर से दायर दुष्कर्म का मामला खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी ने शादी के बहाने उसके साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए और बाद में ऐसा करने में असमर्थता जताई। 
विज्ञापन

बाद में अदालत को बताया गया कि आरोपी और शिकायतकर्ता ने आपसी सहमति से एक-दूसरे से शादी करने के लिए सहमति जताई और कोर्ट मैरिज की। शिकायतकर्ता ने अदालत को बताया कि वह उस व्यक्ति के साथ खुशी-खुशी रह रही है और वह गलत धारणा के तहत दर्ज की गई एफआईआर को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है। आरोपी अपने परिवार के विरोध के कारण महिला से शादी करने में इच्छुक नहीं था।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी नंबर 2 के बीच संबंधों की प्रकृति को देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि ऐसा कोई कथित वादा दुर्भावना से किया गया या प्रतिवादी नंबर 2 को धोखा देने के लिए किया गया, लेकिन याचिकाकर्ता के परिवार में बाद में जो कुछ हुआ उसके कारण ऐसा हुआ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें