न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा, ऐसे पर्याप्त सबूत हैं जो जोड़े के विवाहित जीवन में पत्नी के माता-पिता और परिवार के सदस्यों द्वारा अनुचित हस्तक्षेप का संकेत देते हैं, जिससे पति को काफी परेशानी होती है।
उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक व्यक्ति को उसकी पत्नी की ओर से की गई क्रूरता का हवाला देते हुए तलाक की मंजूरी दे दी। महिला कथित तौर पर माता-पिता के अनुचित प्रभाव में थी। इससे वैवाहिक बंधन की स्थापना में बाधा आ रही थी।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा, ऐसे पर्याप्त सबूत हैं जो जोड़े के विवाहित जीवन में पत्नी के माता-पिता और परिवार के सदस्यों द्वारा अनुचित हस्तक्षेप का संकेत देते हैं, जिससे पति को काफी परेशानी होती है।
पीठ ने यह फैसला पारिवारिक अदालत के पिछले फैसले के खिलाफ पति की अपील पर दिया है। पारिवारिक अदालत ने उसे तलाक देने से इन्कार कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने यह भी नोट किया कि दोनों पक्ष लगभग 13 साल से अलग-अलग रह रहे है।
विज्ञापन
इस दौरान पति को वैवाहिक संबंधों से वंचित होना पड़ा और अपने खिलाफ दायर विभिन्न शिकायतों को सहन किया, जो क्रूरता के कृत्य है।पीठ अपने आदेश में कहा कि पति ने अपनी पत्नी द्वारा उस पर की गई क्रूरता को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है, जिससे वह तलाक का हकदार बन गया है।