दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर-पूर्व जिले के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग के सचिव को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि यहां के स्कूलों की स्थिति अत्यंत खराब है। साथ ही निर्देश दिया कि इस चूक के लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील अशोक अग्रवाल द्वारा दी गई एक रिपोर्ट पर विचार करते किया। वकील ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्कूलों के दौरे के समय टूटी हुई डेस्क और क्लासों की कमी के साथ-साथ पुस्तकों की आपूर्ति आदि गड़बड़ी पाईं। जिस पर अदालत ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कहा कि आपको स्वयं जमीनी स्तर पर जाना चाहिए। यह आपका काम है। आपकी उदासीनता बच्चों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।
साथ ही वकील अशोक अग्रवाल ने अदालत से कहा है जिले में एक स्कूल टिन की इमारत में चलाया जा रहा था और कभी-कभी एक ही क्लास में दो अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को बैठाया जा रहा था। अदालत ने टिप्पणी की है कि अधिकारियों की योजना की कमी के कारण बच्चों में स्कूल के प्रति उदासीनता है। अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।