दिल्ली सरकार ने मान लिया कि नर्सरी कक्षा में दाखिले के लिए दूसरे राज्यों से स्थानांतरण होकर दिल्ली आने वाले अभिभावकों के बच्चे को 5 अंक अतिरिक्त दिए जाने के प्रावधान का दुरुपयोग हो रहा है।
सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि अब तक की जांच में 1520 में से 844 आवेदन फर्जी पाए गए हैं। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार को दाखिलों के लिए फिर से दिशा निर्देश तय कर नए सिरे से लॉटरी कराने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने अपने फैसले में कहा यह काफी गंभीर मामला है कि बच्चों को दाखिला दिलाने को अभिभावक फर्जी दस्तावेज पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा इस प्रकार की प्रक्रिया से दाखिलों के लिए मान्य वाजिब बच्चे वंचित रह जाते हैं। अदालत ने शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिया कि इस संबंध में बृहस्पतिवार तक नए नियम तय किए जाएं।
अदालत के इस आदेश के बाद दाखिलों के लिए अब तक निकाली गई लॉटरी रद्द मानी जाएगी। इससे पूर्व दिल्ली सरकार के अधिवक्ता राजू रामचंद्रन व जुबेदा बेगम ने माना कि स्थानांतरण श्रेणी के आवेदन में काफी घपलेबाजी है।
उन्होंने बताया कि 58 प्रमुख स्कूलों के आवेदनों की जांच में पाया गया है कि 46.80 प्रतिशत आवेदन स्थानांतरण श्रेणी के हैं। इनमें से 2.4 एनसीआर से ही हैं। कुल 1520 में से 844 फर्जी पाए गए हैं।
अदालत ने शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिया कि जिन स्कूलों ने दाखिलों के लिए लॉटरी निकाल दी है, उनमें स्थानांतरण श्रेणी के फार्मों को अलग कर नए सिरे से लॉटरी निकाली जाए। यह आदेश सुधांशु जैन व अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में स्थानांतरण, सिबलिंग या एल्युमिनाई श्रेणी में अतिरिक्त अंक दिए जाने के प्रावधानों को रद्द करने की मांग की है।