सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट के खिलाफ सक्रिय रूप से कार्रवाई करनी चाहिए। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा सोशल मीडिया इतना शक्तिशाली कैसे हो गया? क्या हम इन प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकते? जब उन्हें इतना अमर्यादित कंटेट पता चल जाए तो उन्हें खुद ही उसे हटाना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि वीडियो में दिए गए बयान सच्चाई पर आधारित नहीं हैं, बल्कि अदालत को बदनाम करने और स्कैंडलाइज करने का प्रयास हैं। बेंच ने आशा जताई कि जनता ऐसे बयानों पर कोई ध्यान न दे।
यह है मामला
30 मई को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक इमारत के ढहने से छह लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कपिल कक्कड़ ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर) और लिंक्डइन पर कई वीडियो जारी किए। इन वीडियो में कक्कड़ ने आरोप लगाया कि एक हाईकोर्ट जज ने अवैध निर्माण रोकने वाली याचिका खारिज कर दी थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने इस पर आपराधिक अवमानना की याचिका दायर की। बार एसोसिएशन का कहना है कि कक्कड़ के आरोप पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। वास्तव में जज का आदेश केवल याचिका वापस लेने की अनुमति देने वाला था, क्योंकि उसमें संपत्ति मालिक को पक्षकार नहीं बनाया गया था।