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ऑनर किलिंग करने वालों को नहीं होगी फांसी

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दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑनर किलिंग मामले में फांसी की सजा पाए एक परिवार के पांच सदस्यों को राहत प्रदान कर दी है। अदालत ने लड़की के पिता, ताऊ व उसके बेटे की सजा उम्रकैद में बदल दी। वहीं, लड़की की मां व ताई की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी करने का निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति एस मुरलीधर व न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि दोषियों ने नाबालिग बेटी व उसके प्रेमी की घर बुलाकर हत्या कर दी थी।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषियों की उम्रकैद किसी भी हालत में 20 वर्ष से कम नहीं होगी। वहीं, खंडपीठ ने फैसले में लड़की की मां माया व ताई खुशबू को भी मिली फांसी की सजा रद्द कर दी।
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साबित नहीं हुआ मां और ताई पर आरोप

अभियोजन पक्ष इसे साबित करने में पूरी तरह से सफल भी रहा है, लेकिन दोषियों की कोई आपराधिक भूमिका नहीं रही है। इसके अलावा दोषी संजीव युवा है और उसका विवाह भी नहीं हुआ है।

अदालत ने कहा कि दोषियों से समाज को कोई खतरा भी नहीं है और सुधार की आशा की जा सकती है। ऐसे में फांसी की सजा देना उचित नहीं है। अत: ओमप्रकाश, सूरज व संजीव को मिली फांसी की सजा उम्रकैद में बदली जाती है।

अदालत ने कहा कि पेश साक्ष्यों से लड़की की मां माया व ताई का अपराध साबित नहीं हुआ है। गवाहों के बयानों के अनुसार, घटना के समय वे घर से बाहर खड़ी थीं।
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यह था पूरा मामला

पेश मामले के अनुसार, स्वरूप नगर इलाके में परिवार ने 18 जून 2010 को नाबालिग बेटी व उसके प्रेमी की घर बुलाकर जघन्य हत्या कर दी थी।

इस मामले में प्रेमी अलग जाति का था। दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे और शादी की मंशा परिजनों के सामने जाहिर कर चुके थे।

इसी कारण 18 जून 2010 को लड़की के पिता सूरज, मां माया, ताऊ ओमप्रकाश, पत्नी खुशबू व उनके बेटे संजीव ने मिलकर प्रेमी जोड़े को पहले पीटा और करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिया था।
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