नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पाइसजेट एयरलाइंस और उसके प्रबंध निदेशक अजय सिंह की उस याचिका को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने कंपनी द्वारा 144 करोड़ रुपये जमा करने के बजाय अजय सिंह की गुरुग्राम स्थित संपत्ति को कुर्क करने की अनुमति मांगी थी। यह राशि पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन और केएएल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ लंबे समय से चल रहे मध्यस्थता विवाद में बकाया ब्याज के रूप में जमा करनी है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने स्पाइसजेट की दलील को खारिज करते हुए कंपनी को चार सप्ताह के भीतर 144 करोड़ रुपये (लगभग 144.51 करोड़) जमा करने का अंतिम आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति आईडीएफसी बैंक के पास गिरवी रखी हुई है और सुप्रीम कोर्ट पहले ही ऐसी याचिकाओं को खारिज कर चुका है, जिसमें स्पाइसजेट पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।स्पाइसजेट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने अदालत में कहा कि कंपनी वित्तीय संकट का सामना कर रही है और इतनी बड़ी राशि जमा करने से संचालन प्रभावित होगा।
यह विवाद वर्ष 2015 का है, जब स्पाइसजेट गंभीर वित्तीय संकट में थी। उस समय कलानिधि मारन और केएएल एयरवेज ने अपनी 58.46% हिस्सेदारी अजय सिंह को मात्र 2 रुपये में हस्तांतरित की थी, साथ ही कुछ वित्तीय सहायता समझौते हुए थे। बाद में दोनों पक्षों के बीच दायित्वों को लेकर विवाद हुआ, जिसे मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने सुलझाया। 2018 में मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने स्पाइसजेट और अजय सिंह को 308.21 करोड़ रुपये मूलधन के साथ 12% ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया था।