दूसरी ओर अध्यात्मिक विश्वविद्याल के वकील आलोक पोपने ने कहा आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में केवल अध्यात्म की शिक्षा दी जाती है। इसलिये किसी से भी कोई फीस नहीं ली जाती, इसलिये उस पर यूजीसी के नियम लागू नहीं होते।
कोर्ट ने पांच फरवरी को पूछा था कि बाबा किस आधार पर विश्वविद्यालय शब्द का प्रयोग कर रहा है। सीबीआई ने पिछली तारीख पर कोर्ट को बताया था कि बाबा वीरेंद्र दीक्षित के खिलाफ लुक आउट कॉर्नर (एलओसी) नोटिस जारी कर दिया गया है क्योंकि उसका कोई सुराग नहीं है।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुये कहा बाबा को तलाश करने के लिये सीबीआई कानूनी दायरे में हर संभव कोशिश करे। इस मामले की गंभीरता के मद्देनजर केस की जांच कोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी थी। एक एनजीओ ने जनहित याचिका दायर कर विजय विहार स्थित आश्रम में युवती व महिलाओं को बंधक रखने का मुद्दा उठाया था।