उच्च न्यायालय ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को इतिहासकार ऑड्रे ट्रुशके द्वारा विनायक दामोदर सावरकर की दो-खंड की जीवनी के संबंध में कथित साहित्यिक चोरी पर इतिहासकार डॉ. विक्रम संपत के खिलाफ पोस्ट किए गए पांच और ट्वीट्स को हटाने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा कि विचाराधीन ट्वीट प्रकृति में मानहानिकारक है और उक्त ट्वीट्स में पत्रों के लिए एक लिंक पोस्ट किया गया है। अदालत ने इनके प्रकाशन पर 18 फरवरी और 24 फरवरी के आदेश में रोक लगा दी थी।
अदालत ने संपत की और से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए आदेश दिए। आवेदन में ट्रुश्के द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किए गए और अपमानजनक ट्वीट्स को हटाने का निर्देश देने की मांग की गई। इससे पहले भी इस साल फरवरी में कोर्ट ने संपत के खिलाफ ट्रुशके द्वारा किए गए कुछ ट्वीट्स को हटाने का आदेश दिया था।
संपत ने ऑड्रे ट्रुश्के और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ रॉयल हिस्टोरिकल सोसाइटी को भेजे गए एक पत्र पर मुकदमा दायर किया है, जिसमें उनके खिलाफ एक जर्नल प्रकाशन और विनायक दामोदर सावरकर की दो-खंड की जीवनी और कुछ कथित मानहानिकारक ट्वीट्स के संबंध में साहित्यिक चोरी के आरोप लगाए गए है।
मुकदमे में कहा गया है कि इतिहासकार ऑड्रे ट्रुश्के और अन्य व्यक्तियों जैसे अनन्या चक्रवर्ती और रोहित चोपड़ा ने 11 फरवरी को लंदन में रॉयल हिस्टोरिकल सोसाइटी को पत्र लिखकर साहित्यिक चोरी के गंभीर आरोप लगाए।
इससे पहले कोर्ट ने डॉ. ऑड्रे ट्रुश्के और अन्य व्यक्तियों को ट्विटर के साथ-साथ अन्य ऑनलाइन या ऑफलाइन प्लेटफॉर्म पर संपत के खिलाफ किसी भी तरह की मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया था।