दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र और भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को आदेश दिया है कि वह एसिड अटैक पीड़िताओं को भी दिव्यांग कोटे के तहत रोजगार में आरक्षण मुहैया कराएं।
एक एसिड पीड़िता ने रोजगार के अधिकार का मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में उठाया था। इसके बाद न्यायालय का यह आदेश आया है। 2016 में सरकार ने यह घोषणा की थी कि एसिड अटैक पीड़िताओं को भी दिव्यांग श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए ताकि वे भी रोजगार में दिव्यांग कोटे के तहत आरक्षण हासिल कर सकें।
हालांकि, सरकार ने इस संबंध में कोई भी अधिसूचना विभागों को नहीं दी थी। वहीं, 28 जनवरी, 2018 को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने सभी केंद्र सरकार के विभागों को अधिसूचना जारी कर कहा था कि हर भर्ती में एक फीसदी आरक्षण एसिड अटैक पीड़िताओं और अल्प दृष्टि, बहरेपन से पीड़ित और लोको मोटर दिव्यांगों के लिए सुनिश्चित होना चाहिए।
नए नियमों और अधिनियमों के मुताबिक, हर सरकारी संस्थाओं को दिव्यांगों की मदद के लिए एक शिकायत निवारण अधिकारी भी नियुक्त करना है। साथ ही अधिकारी को शिकायतों और उनके निवारण का पूरा रिकॉर्ड भी रखना होगा। इसके अलावा हर शिकायत या मामले को दो महीनों के भीतर जांच कर उसका सिर्फ निवारण ही नहीं बल्कि शिकायतकर्ता को सूचित भी करना होगा।