न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने इल्मी द्वारा मानहानि का मामला दर्ज करने के बाद यह आदेश पारित किया। पिछली सुनवाई में उच्च न्यायालय ने सरदेसाई और इंडिया टुडे के वकील से पूरा असंपादित वीडियो रिकॉर्ड पर रखने को कहा था।
वीडियो को आज रिकॉर्ड में रखा गया और इसे देखने के बाद न्यायालय ने कहा कि वीडियो को इंडिया टुडे के कैमरापर्सन ने तब रिकॉर्ड किया था, जब इल्मी ने खुद को शो से हटा लिया था। उन्होंने कहा इस न्यायालय का यह भी मत है कि चूंकि वीडियो को तब रिकॉर्ड किया गया था, जब इल्मी ने खुद को शो से हटा लिया था, इसलिए घटनाओं का होना वादी और कैमरापर्सन के बीच का मामला है।
चूंकि सरदेसाई के वकील ने मामले में स्थगन की मांग की थी इसलिए न्यायालय ने निर्देश दिया कि इल्मी की अंतरिम राहत के आवेदन पर निर्णय होने तक सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो को हटा दिया जाना चाहिए।
यह विवाद 26 जुलाई को इंडिया टुडे पर सरदेसाई द्वारा कारगिल विजय दिवस (कारगिल विजय दिवस) पर राजनीति पर आयोजित बहस से उत्पन्न हुआ। कार्यक्रम में अग्निवीर और रक्षा बलों के राजनीतिकरण के मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
जब मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) यश मोर अग्निवीर योजना में कमियों की ओर इशारा कर रहे थे, तब भाजपा प्रवक्ता ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद सरदेसाई और इल्मी के बीच झड़प हो गई। जब इल्मी ने हस्तक्षेप किया तो सरदेसाई ने कहा कि पूर्व जनरल कठोर तथ्य पेश कर रहे हैं।
इल्मी ने जवाब दिया, उपदेश मत दो। पत्रकार और इल्मी के बीच कई मिनट तक तीखी बहस हुई, जिसके बाद इल्मी शो छोड़कर चली गईं। उसी रात इल्मी ने अपने एक्स अकाउंट पर एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें सरदेसाई पर शो में उनका फेडर (वॉल्यूम) कम करने का आरोप लगाया गया।