दिल्ली में मानसून के दौरान भी जलभराव के बावजूद जिन इलाकों में भूजल स्तर नीचा है, वहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए भूजल स्तर को सुधारा जा सकता है। यह टिप्पणी रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़ी एक याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने की है।
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और चंदरशेखर की पीठ ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए कहा कि राजधानी में कई पुरानी इमारतें हैं, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना संभव नहीं है। ऐसे इलाकों में वर्षा जल के संचयन के लिए बरसाती नालों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़कर बेहतर तंत्र बनाया जा सकता है।
पीठ ने दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगमों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसी कॉलोनियों की पहचान करें जहां भूजल स्तर नीचे है। इसके बाद बरसाती नालों के जरिए वर्षा जल को इलाकों में पहुंचाकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को मजबूत किया करें।
इसके साथ ही पीठ ने संबंधित प्राधिकरणों को ऐसी 5-7 कॉलोनियों में पायलट प्रोजेक्ट पर काम करने के निर्देश दिए हैं, जहां का भूजल स्तर, जलभराव की समस्या के दौरान काफी नीचे गिरा हुआ है। पीठ ने इस संबंध में 20 सितंबर तक एक्शन टेकन रिपोर्ट दायर करने के निर्देश दिए हैं।
यह जनहित याचिका वकील आर.के कपूर द्वारा दायर की गई है। याचिका में दिल्ली में खास तौर पर सरकारी इमारतों और अस्पतालों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की मांग की गई है।