दिल्ली हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशन के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी है। याचिका में लिव-इन रिलेशन के मामलों को आईपीसी के तहत दुष्कर्म की धाराओं में दर्ज करने के आदेश देने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नही आता। अदालत कैसे पुलिस को यह कह सकती है कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर ले और किसी को छोड़ दे। यह दुष्कर्म के कानून का गलत इस्तेमाल होगा।
पेश मामले में अनिल दत्ता शर्मा ने याचिका दायर की थी कि लिव-इन रिलेशन के मामलों में धोखाधड़ी व दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि ऐसे मामलों में आरोपी बनाए गए लोगों को बरी किया गया है क्योंकि इस प्रकार के फर्जी मामले दर्ज करवाएं जाते हैं।
उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत मामलों में अदालत ऐसे मामलों में लिप्त आरोपियों को बरी कर रही हैं और आरोपी के पूरे परिवार को शर्मिंदगी व परेशानी उठानी पड़ती है। सरकार लिव-इन रिलेशन मामलों में धारा 376 में मामला दर्ज करने के प्रावधान पर पुनर्विचार करे। फर्जी मामला दर्ज करवाने वाली महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।