हरियाणा क्षेत्र में औद्योगिक कचरे को यमुना में प्रवाहित करने से जल में अमोनिया की मात्रा में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जलसंकट कमोबेश बरकरार है। चंद्रावल, वजीराबाद और ओखला स्थित ट्रीटमेंट प्लांटों से घरों में जलापूर्ति कम हुई है। इससे आपूर्ति भी कम प्रेशर से हो रही है। पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। हालात में सुधार होने तक दिल्लीवासियों को कम पानी से गुजारा करना पड़ सकता है। हालात काबू करने में अधिक देरी हुई तो दिल्लीवासियों को बीमारियों से जूझना पड़ सकता है।
दिल्ली जल बोर्ड रोज औसतन 900 एमजीडी पानी की आपूर्ति करता है। प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी के बाद पानी की आपूर्ति भी 10-20 फीसदी तक कम हो गई है। जब तक पानी में अमोनिया की मात्रा कम नहीं होती, आपूर्ति प्रभावित रहने की आशंका जताई गई है। हालात में सुधार होने तक उत्तरी, दक्षिणी, पश्चिमी, मध्य दिल्ली व एनडीएमसी क्षेत्र में जलापूर्ति तो होगी, लेकिन दबाव कम रहेगा। यानी पानी की किल्लत का भी लोगों को सामना करना पड़ सकता है। इसलिए लोगों को पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करने का सुझाव दिया गया है।