25 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने गुरमत कैंपों में लिया हिस्सा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) ने विद्यार्थियों को पंजाबी मातृभाषा व सिख विरासत से जोड़ने की मुहिम तेज कर दी है, वहीं बंदी सिंहों की रिहाई के लिए चल रहे कौमी इंसाफ मोर्चा के संघर्ष में सक्रिय सहयोग का ऐलान किया है। अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका व महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने बुधवार को ये प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं।
गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में घर-घर पंजाबी 2026 अंतर-स्कूल पंजाबी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें दिल्ली के गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कालका व काहलों ने कहा कि वैश्वीकरण में अन्य भाषाएं सीखना जरूरी है, लेकिन मातृभाषा को भूलना नहीं चाहिए, क्योंकि पंजाबी से ही गुरमत ज्ञान व गुरबाणी से जुड़ाव मजबूत होता है।
कमेटी के अनुसार, गुरमत कैंपों में भागीदारी लगातार बढ़ी है। पहले वर्ष 4,000, दूसरे में 8,000, तीसरे में 16,000 और इस वर्ष 25,000 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कैंपों के लिए विशेष पुस्तकें भी तैयार करवाई गई हैं।
कालका ने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई सिख कौम का बड़ा मुद्दा है, और मोर्चा जो भी संघर्ष की रूपरेखा तैयार करेगा, दिल्ली कमेटी उसमें बढ़-चढ़कर सहयोग करेगी।