राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के जल स्रोतों की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने कहा कि अधिकारियों की तरफ से प्रस्तुत जवाब केवल असोला की 10 प्रमुख आर्द्रभूमियों तक ही सीमित था जिनके लिए पहले ही कदम उठाए जाने की बात कही गई थी लेकिन अन्य जलाशयों के संबंध में कोई प्रभावी जवाब नहीं मिला है। मामले में अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी। इस दौरान जल निकायों के संरक्षण और बहाली से जुड़े एक अन्य मामले पर भी सुनवाई होनी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली राज्य नमभूमि प्राधिकरण और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने नई प्रतिक्रिया देने के लिए अदालत से समय मांगा था। यह मामला दिल्ली में जल स्रोतों पर अवैध अतिक्रमण और प्रदूषण से जुड़ा है। 12 मार्च को मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के कुल 142 छोटे जल स्रोतों में से 20 फीसदी पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया है। इनमें से 9 फीसदी को पार्क बना दिया गया है जबकि 12 फीसदी में दूषित पानी भर गया है। इससे पहले दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण की तरफ से 7 अप्रैल को अदालत में सौंपी रिपोर्ट से पता चला है कि मौजूदा समय में दिल्ली में कुल 1,046 जल निकाय हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण ने पहले चरण में 631 जल निकायों को पुनर्जीवित करने का निर्देश दिया है। इनमें से अब तक 256 जलाशयों के कायाकल्प का काम पूरा हो चुका है। इससे पहले भू-स्थानिक दिल्ली लिमिटेड (जीएसडीएल) ने ऐसे 322 स्थानों की पहचान की थी, जहां जलाशय है। मगर राजस्व विभाग की जमीनी पड़ताल में इनमें से सिर्फ 43 की ही पहचान हो पाई थी। ऐसे में नमभूमि प्राधिकरण ने राजस्व विभाग से इन 43 जल निकायों का मानचित्रण करने और उन्हें राजस्व रिकॉर्ड में जोड़ने को कहा था। वहीं, दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण ने दो दिसंबर, 2024 को जानकारी दी थी कि शहर में कुल 1,367 जल निकाय हैं। इनमें से 1,045 सूची में हैं, जबकि 322 का पता उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों से चला है। इनमें से 674 के लिए जमीनी सत्यापन का काम पूरा हो चुका है। यह वो जल निकाय हैं जिन्हें साफ तौर पर देखा जा सकता है।