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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में मेडिकल रूम: हर स्कूल में तैनात होगा स्वास्थ्यकर्मी, सालाना खर्च होंगे 48.87 करोड

Sun, 25 Oct 2026 05:54 PM IST
Rahul Kumar Tiwari नई दिल्ली, पीटीआई

सार

दिल्ली के 1,086 सरकारी स्कूलों में 48.87 करोड़ रुपये सालाना की लागत से प्राथमिक उपचार के लिए मेडिकल रूम बनाए जाएंगे। हर स्कूल में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी भी तैनात होगा।
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दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद - फोटो : @ashishsood_bjp
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विस्तार
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दिल्ली सरकार शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत आने वाले सभी 1,086 सरकारी स्कूलों में प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराएगी। इसके लिए अनुमानित 48.87 करोड़ रुपये सालाना खर्च किए जाएंगे। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने रविवार को यह जानकारी दी।

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एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रस्तावित सुविधाओं के तहत स्कूल समय में विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक स्कूल में सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) या बहुउद्देशीय स्वास्थ्यकर्मी जैसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की तैनाती की जाएगी।

इन मेडिकल रूम में घावों की ड्रेसिंग, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) देना और निगरानी में अस्थायी रूप से आराम करने जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। हालांकि, यहां जांच संबंधी सेवाएं नहीं दी जाएंगी और न ही दवाएं लिखी जाएंगी।
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इस पहल का उद्देश्य स्कूल के समय में विद्यार्थियों को लगने वाली मामूली चोटों, अचानक तबीयत खराब होने, थकान, चक्कर आने और अन्य अस्थायी शारीरिक परेशानियों से निपटना है। बयान के मुताबिक, इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। शुरुआत उन स्कूलों से होगी, जहां इन सुविधाओं के लिए अलग कमरे उपलब्ध हैं। इसके बाद उन स्कूलों में व्यवस्था की जाएगी, जहां वैकल्पिक कमरों या पोर्टा केबिन की मदद से मेडिकल रूम बनाए जाएंगे।

बयान में कहा गया है कि इन सुविधाओं के तहत छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए एक निजी स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह प्रस्ताव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है, जिसमें सुरक्षित, समावेशी और सहयोगपूर्ण शैक्षणिक माहौल तैयार करने की परिकल्पना की गई है।

आशीष सूद ने कहा, 'हमारे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाला हर बच्चा सुरक्षित और देखभाल वाले माहौल का हकदार है। जब कोई विद्यार्थी स्कूल के समय में बीमार पड़ता है या उसे चोट लगती है, तो अभिभावकों और शिक्षकों को यह भरोसा होना चाहिए कि स्कूल परिसर में ही तत्काल प्राथमिक उपचार और उचित देखभाल उपलब्ध है।'

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