आप 42 हजार से ज्यादा फेल छात्रों को स्कूल से बाहर कैसे कर सकते हैं। यह सवाल हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार से पूछा। हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर इन छात्रों को दोबारा दाखिला नहीं दिया गया तो कोर्ट को आदेश जारी करना पड़ेगा।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तारीख तय की है। शिक्षा विभाग के निदेशक को अगली तारीख पर शपथ पत्र पेश करने के लिए कहा गया है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि सभी छात्रों को दाखिला दिया जाए, ताकि वह अपनी पढ़ाई आगे जारी रख सकें।
जनहित याचिका दायर करने वाले एनजीओ ‘सोशल जूरिस्ट’ की ओर से जिरह करते हुए अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा इस साल सरकारी स्कूल के 136663 छात्रों ने दसवीं की परीक्षा दी थी। इनमें 94160 छात्र पास हुए थे और कुल 42503 छात्र फेल हो गए थे। इन छात्रों को सरकारी स्कूलों में दोबारा दाखिला देने से इनकार कर दिया गया था। ऐसा करना दिल्ली एजूकेशन रूल्स-1973 के रूल 138 का खुला उल्लंघन है। इस नियम के मुताबिक अपने फेल छात्रों को दोबारा दाखिला देने के लिए सभी स्कूल बाध्य हैं।