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बाल दिवस और शिक्षक दिवस में फर्क नहीं जानती सरकार?

Thu, 04 Sep 2014 08:58 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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एक ओर जहां देश भर में शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को सुनने के लिए स्कूलों को तैयार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली सरकार को यही नहीं पता कि शिक्षक दिवस आखिर है क्या?
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इस बात का खुलासा दिल्ली सरकार की ओर से जारी किए गए उस मीटिंग नोटिस से हुआ है जिसमें पांच सितंबर को 'बाल दिवस' के रूप में मनाए जाने का जिक्र है।

शिक्षा विभाग की एडिशनल डायरेक्टर मधु रानी तेवतिया की ओर से 29 अगस्त को जारी किए गए इस नोटिस लिखा गया है कि 5 सितंबर को 'बाल दिवस' के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाइव भाषण के प्रसारण के संबंध में जरूरी बैठक बुलाई है।

ये बैठक दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव ने बुलाई थी जिसमें सरकार के दिल्ली सचिवालय और एनडीएमसी के अलावा निगम आयुक्त भी मौजूद रहेंगे।

दिल्ली सरकार की ये गलती वाकई गंभीर है। बाल दिवस 14 नवंबर को होता है, जबकि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

दरअसल, एचआरडी मिनिस्ट्री की ओर से एक आदेश जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि देशभर के सभी स्कूलों में शिक्षक दिवस को गुरु उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश के छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करेंगे। हालांकि इस मामले में कई राजनीतिक दल और निजी स्कूल भी विरोध जता रहे हैं।
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बता दें कि देश्ा के पहले उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार केंद्र की भाजपा सरकार ने इसका नाम बदल कर गुरु उत्सव कर दिया है।
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