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दिल्ली सरकार को लगेगा झटका, विस को नहीं सीआरपीसी में संशोधन का अधिकार

Thu, 11 Aug 2016 12:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली सरकार को अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संशोधन करके किसी भी ऐसे मामले में जिसमें सरकार चाहे, मजिस्ट्रेट जांच कराने की शक्ति के लिए बदलाव की कोशिश को झटका लग सकता है। 
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क्योंकि गृह मंत्रालय जल्द दिल्ली विधानसभा से अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (दिल्ली संशोधन) बिल, 2015 भी केंद्र सरकार को वापस भेज सकती है।गृह मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से जो राय मांगी थी, उसमें तमाम कोर्ट आदेशों का हवाला देकर कहा गया कि दिल्ली विधानसभा को किसी भी ऐसे कानून को निरस्त करने, संशोधित करने या बनाने का अधिकार नहीं है।

हालांकि, दिल्ली सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि अभी केंद्र सरकार को भेजा गया विधेयक वापस नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार, कानून मंत्रालय ने लिखा है कि केंद्रीय कानून है जो समवर्ती सूची-3 में दूसरे नंबर पर है। ऐसे में तमाम न्यायालय आदेशों को देखते हुए साफ है कि दिल्ली विधानसभा को सीआरपीसी में संशोधन का अधिकार नहीं है। 
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जानिए क्या है पूरा मामला

दिल्ली विधानसभा
सूत्र बताते हैं कि कानून मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन बनाम दिल्ली सरकार के कोर्ट फीस के फैसले समेत कुछ अन्य मामलों का हवाला देकर कहा कि किसी भी केंद्रीय कानून में दिल्ली विधानसभा को बदलाव की शक्ति नहीं है। 

राय में संविधान के अनुच्छेद 239एए का जिक्र करके कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए कानून बनाने का अधिकार संसद की तरफ से हस्तांतरित नहीं किया गया है। 

संविधान के अनुच्छेद 246 का हवाला देकर कहा है कि इसमें राज्य और केंद्र की विधायिका की शक्ति को अलग-अलग लिखा गया है, लेकिन केंद्र शासित राज्य व राज्य की शक्ति का अलग-अलग जिक्र नहीं है। 

क्या है मामला
अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (दिल्ली संशोधन) बिल, 2015 दिल्ली सरकार ने विधानसभा में केंद्र सरकार या उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना पास किया था। उसमें अपराध दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 176(1) और धारा 174 की उपधारा 3 के क्लाउज दो में दिल्ली सरकार ने संशोधन पास किया था। जब अंतिम मंजूरी के लिए इसे गृह मंत्रालय को भेजा गया तो गृह मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से राय मांगी थी। 
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