दिल्ली सरकार की ई-वाहन पॉलिसी लागू होने के पांच साल के भीतर करीब 6,000 करोड़ रुपये का पेट्रोल व डीजल सरीखा जैविक ईंधन बचेगा। वहीं, करीब 48 लाख टन कार्बन डाई आक्साइड आबोहवा में नहीं घुलेगी।
दिल्ली सरकार की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। डॉयलॉग एंड डवलपमेंट कमीशन (डीडीसी) ऑफ दिल्ली की तरफ से तैयार रिपोर्ट सोमवार को परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का सौंपी गई। रिपोर्ट तैयार करने में वैश्विक शोध संस्था रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट ने भी मदद की है।
इससे पहले दिल्ली सरकार ने ई-वाहन पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया है। इसे जल्द ही नोटीफाई किया जाना है। इसमें कहा गया है कि 2024 तक दिल्ली में ई-वाहनों की संख्या 25 फीसदी हो जाएगी।
इसके लिए अगले पांच सालों में पांच लाख ई-वाहनों की जरूरत है। डीडीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर पॉलिसी उम्मीद पर खरी उतरती है तो न सिर्फ जैविक ईंधन की बचत होगी, बल्कि कार्बन डाई आक्साइड का उत्सर्जन भी थमेगा। कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा पेट्रोल की एक लाख कारों से होने वाले उत्सर्जन के बराबर होगी। इसके साथ धूल के महीन कणों पीएम 2.5 में करीब 159 टन की कमी आएगी।