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एसिड हमलों की पीड़ितो के लिए दिल्ली सरकार की पहल

Tue, 23 Jun 2015 02:16 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली की आप सरकार ने अपने एक बहुत बड़े फैसले में एसिड पीड़िताओं को राहत देने की पहल की है। अब दिल्ली सरकार एसिड हमलों के बाद अपनी जिंदगी बिता रही पीड़िताओं को सरकारी नौकरी देगी।
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सरकार की इस पहल को शाहीन जैसी एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए एक बड़ी मदद के रूप में माना जा रहा है जो आज भी अपने लिए न्याय की मांग कर रही हैं।

बता दें कि 2009 एसिड अटैक का शिकार हुई शाहीन ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से पूछा था कि क्या सीएम के पास शाहीन जैसी महिलाओं के लिए कोई योजना है कि नहीं।

2013 में जब शाहीन ने 181 हेल्पलाइन पर फोन करके अपने लिए मदद मांगी थी तब वह चर्चाओं में आई थी। हेल्पलाइन ने नौकरी के लिए उसकी कॉल तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित के सामने भी रखी थी।
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पीड़ितों को मिलेगी नौकरी

एसिड अटैक में उसकी आंख की रोशनी चली गई है व उसका आधा चेहरा भी खराब हो गया है। उसके केस ने इस बात पर भी रोशनी डाली थी कि सीएम के दफ्तर में एसिड पीड़िताओं के कितने फोन जाते हैं।

दिल्ली सरकार के सामाजिक वेलफेयर विभाग के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में करीब 35 एसिड पीड़िताएं हैं। यह आंकड़ें अधिक भी हो सकते हैं इसलिए आप सरकार ने ऐसी महिलाओं की नौकरी और उनके रिहेबिलिटेशन के लिए एक अलग क‌मेटी गठित करने की योजना बनाई है।

जानकारी के अनुसार एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं का एक समूह सीएम केजरीवाल से मिला था और उस मुलाकात में उन्होंने अपने लिए सरकारी नौकरी की बात की थी।

सीएम की सलाहकार स्वाती मालीवाल ने इस विषय में बताया कि सरकार ने इस विषय में गहन अध्ययन किया है जिसके बाद ये प्रस्ताव रखा गया है कि इन महिलाओं को राहत के रूप में इनकी योग्यतानुसार कॉन्ट्रैक्ट या परमानेंट बेसिस पर नौकरी दी जाएगी।
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'सरकार की पहल आशा की किरण'

स्वाति ने आगे बताया कि सीएम ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और अब संबंधित विभाग इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर काम करेंगे और यह संभव बनाने में मदद करेंगे कि कैसे इस प्रस्ताव का पूर्ण किया जाए।

दिल्ली सरकार के सेवा विभाग को इन महिलाओं से उनकी प्रमुखता के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन मंगाने का निर्देश दे दिया गया है।शाहीन ने सरकार की इस पहल को आशा की किरण का कहा है।

उसने बताया कि उसने केजरीवाल सरकार से 2014 में भी इलाज के लिए गुहार लगाई थी लेकिन उस वक्त कुछ न हो सका। हालांकि जब इस साल मार्च में वो अन्य पीड़िताओं के साथ गई तो सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उनके हक में कोई न कोई फैसला जरूर लेंगे।

जिस वक्त शाही के ऊपर 19 नवंबर 2009 में यह अटैक हुआ था वह पानीपत के एक प्रोफेशनल संस्थान में काउं‌सिलर थी। साथ ही साथ वो एमबीए के आखिरी सेमेस्टर की पढ़ाई भी कर रही थी।
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