जेम्स ने आगे बताया कि बाद में उन्हें एक अखबार बांटने वाले ने बताया था कि एना अचानक सड़क पर आ गई थी और उसे एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में एना को काफी चोट आई थी और उसका खून बुरी तरह बह रहा था।
तब हमारे पड़ोसी उसे पंजाबी बाग के एक नामी अस्पताल में ले गए। तब तक जेम्स भी अस्पताल पहुंच गया और एना आईसीयू में भर्ती थी। बेटी की बुरी हालत देखकर जेम्स पहले ही चिंता में था और इलाज के खर्चे की चिंता उसे डराए जा रही थी। 13000 रुपये मासिक कमाने वाला जेम्स इतने महंगे अस्पताल में बेटी का इलाज कैसे करा सकता था।
इसी बीच जेम्स को किसी ने दिल्ली सरकार की कैशलेस स्कीम के बारे में बताया। बच्ची के अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाने के बाद भी उसे अस्पताल से कोई बिल नहीं मिला था।
जेम्स ने बताया कि वैसे तो उसे असल बिल की राशि का ठीक-ठीक पता नहीं है लेकिन यह खर्च सात-आठ लाख के बीच रहा होगा। जेम्स ने यह अंदाज इस बात से लगाया क्योंकि कई बार एक इंजेक्शन का खर्च ही 30 हजार रुपये तक हुआ करता था।
एना अब स्कूल जाने लगी है और किसी भी सामान्य बच्चे की तरह जिंदगी जी रही है। दिल्ली सरकार के अधिकारियों के अनुसार दिल्ली सरकार की कैशलेस स्कीम की मदद से 1 फरवरी 2018 से लेकर अब तक 3000 जानें बच चुकी हैं।
इस स्कीम के तहत निजी अस्पतालों को दुर्घटना में घायल, एसिड अटैक का शिकार हुए और जलकर घायल हुए लोगों को मुफ्त इलाज देना अनिवार्य है। इसके लिए निजी अस्पतालों को अपने यहां बोर्ड लगाकर लोगों को सूचित भी किया जाना जरूरी।