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दिल्ली सरकार दिव्यांगजनों के प्रति कर्तव्यों से पीछे नहीं हट सकती : हाईकोर्ट

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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति अपने वैधानिक कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ सकती। अदालत ने मांसपेशियों की दुर्बलता (मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) से पीड़ित एक बच्चे को चौबीस घंटे का पुरुष अटेंडेंट उपलब्ध न कराने पर सरकार की विफलता की कड़ी आलोचना की। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार अपने कर्तव्यों से हाथ खड़े नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 5 के अनुसार दिव्यांग व्यक्तियों को समुदाय में सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है और सरकार को व्यक्तिगत सहायता सहित आवश्यक सामुदायिक सेवाएं उपलब्ध करानी चाहिए। मामला एक मां की अपील पर आया था, जिसमें उन्होंने फैमिली कोर्ट के आदेश की अवहेलना का हवाला दिया था। जुलाई 2022 में फैमिली कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट और स्वास्थ्य विभाग को बच्चे के लिए अटेंडेंट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने कहा कि उसके पास ऐसा कोई प्रावधान या योजना नहीं है।
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अदालत ने दिल्ली सरकार को चार सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि अधिनियम की धारा 88 के तहत दिव्यांगजनों के लिए राज्य कोष का गठन किया गया है या नहीं तथा धारा 5 के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी।
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