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प्रदूषण से निजात पाने के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, 1000 इलेक्ट्रिक बस खरीदने को मंजूरी

Thu, 12 Jul 2018 02:17 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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फाइल फोटो
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दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को रोकने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके लिए कैबिनेट ने 1000 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सरकार की योजना है कि एक साल में सभी बसों को सड़क पर उतार दिया जाएगा। इसके अलावा परिवहन विभाग हाइड्रोजन बसें चलाने की संभावना तलाशने को भी डिम्ट्स को जिम्मेदारी सौंपी है।   
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कैबिनेट की फैसले की जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि प्रदूषण रहित 1,000 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए डिम्ट्स को बतौर परामर्शदाता नियुक्त किया गया है। 

डिम्ट्स तीन माह में सरकार को इस मामले में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। एक साल के भीतर जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर बसों को सड़क पर उतार दिया जाएगा। बसें लो फ्लोर और वातानुकूलित होगी। 
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कैलाश गहलोत ने बताया कि अब तक दुनिया के किसी भी देश में इतनी बड़ी संख्या में एक साथ इलेक्ट्रिक बसों को सड़क पर नहीं उतारा गया है। जिस तरह दिल्ली के प्रदूषण को दूर करने में पहले सीएनजी ने अहम भूमिका अदा की थी। उसी तरह इलेक्ट्रिक बसें प्रदूषण रोकने में मील का पत्थर साबित होंगी। कैलाश गहलोत ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में पूरा ट्रांस्पोर्ट सिस्टम ई ट्रांसपोर्ट बन जाएगा।    
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इलेक्ट्रिक बसों के बनेंगे नए डिपो

इलेक्ट्रिक बसों के लिये परिवहन विभाग छह नए डिपो बनवाएगा। यह ईस्ट विनोद नगर, बवाना सेक्टर-5, बुराड़ी, रोहिणी सेक्टर-37, रेवला खानपुर व नरेला में स्थापित होंगे। बसों के चार्जिंग प्वाइंट आदि की जिम्मेदारी रियायत पाने वाले ठेकेदार की होगी। यही डिपो में दूसरी बुनियादी सुविधाएं भी विकसित करेगा।      

मनीष सिसोदिया का उपराज्यपाल पर हमला
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने फिर सेवाओं के मामले में केंद्र सरकार व उपराज्यपाल पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सेवा मामले में हस्तक्षेप को दादागीरी करार देते हुए आरोप लगाया कि यह दिल्ली सरकार के काम रोकने के साथ भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की कोशिश है।

सिसोदिया ने बताया कि सरकार ने डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ राशन स्कीम लागू करने का फैसला लिया था। अब अधिकारी कह रहे हैं कि वह सरकार का फैसला नहीं मानेंगे। अधिकारी स्कीम पर काूनन विभाग से राय ली जा रही है। इसके जरिए राशन की कालाबाजारी रोकने में मदद मिलेगी। 
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मनीष सिसोदिया ने बताया कि इसी तरह दिसंबर में डीएसआईआईडीसी ने मजदृरों को 20 फीसदी बोनस देने का फैसला किया था। लेकिन बोर्ड की बैठक में अधिकारियों से सरकार के फैसले को पलटवा दिया। इसके अलावा सीसीटीवी के मसले में भी इसी तरह की अड़चन पैदा की जा रही है।

उपराज्यपाल कह रहे हैं कि कि सीसीटीवी लगवाने के लिये पुलिस से इजाजत लेनी होगी। मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि तीनों फैसलों से पता चलता है कि किस तरह सरकार के काम को सर्विसेज के माध्यम से अटकाया जा रहा है। 
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