दिल्ली उच्च न्यायालय ने चीन को खुफिया सूचनाएं देने के आरोप में गिरफ्तार फ्रीलांस पत्रकार राजीव शर्मा को सर्शत जमानत प्रदान कर दी। न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में पुलिस 60 दिन में आरोपपत्र दायर नहीं कर सकी। ऐसे में आरोपी जमानत पाने का हकदार है।
अदालत ने पुलिस के अधिवक्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया कि आरोपी पर गंभीर आरोप है और मामले में सजा 10 वर्ष से अधिक सजा का प्रावधान है। ऐसे में आरोपपत्र 90 दिन में दायर किया जा सकता है। अदालत ने कहा आरोपी पर जिन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है उसमें सजा 14 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है लेकिन न्यूनतम सजा का कोई उल्लेख नहीं है।
अदालत ने कहा ऐेसे में आरोपपत्र 60 दिन में दायर किया जाना चाहिए था और ट्रायल कोर्ट ने याची के आवेदन को खारिज कर गलत निर्णय दिया है। अदालत ने आरोपी की जमानत एक लाख रूपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार कर ली।
अदालत ने याची को निर्देश दिया कि वह संबंधित थानाध्यक्ष को अपना संपर्क नंबर/पता प्रदान करे, साथ ही वह अपने मोबाइल में अपना लोकेशन एप हर समय खुला रखेगा और अनुमति प्राप्त किए बिना दिल्ली-एनसीआर को नहीं छोड़ेगा।
पुलिस के मुताबिक इस मामले में चीनी महिला और उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि वे फर्जी कंपनियों के जरिए पैसा ले रहे थे। पुलिस की स्पेशल सैल ने आरोपी राजीव शर्मा को पीतमपुरा स्थित निवास से रक्षा संबंधी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया था।