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Delhi Flood: चिल्ला से गढ़ी मांडू तक पानी... मुश्किल में जिंदगानी, यमुना खादर में रहने वाले सैकड़ों लोग बेघर

Fri, 05 Sep 2025 06:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा फिरदौस आलम, पूर्वी दिल्ली

सार

हालात ये हैं कि बाढ़ के पानी से लबालब गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर गांव व यमुना खादर में रहने वाले सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं। ये गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं। 
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गढ़ी मांडू का हाल... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी में चिल्ला बॉर्डर से लेकर गढ़ी मांडू तक बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी मुश्किलों में घिर गई है। हालात ये हैं कि बाढ़ के पानी से लबालब गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर गांव व यमुना खादर में रहने वाले सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं। ये गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं। 

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अब लोगों का आशियाना पुश्ता रोड का किनारा हो गया है। चिल्ला से लेकर खजूरी खास तक टेंट दिखाई दे रहे हैं। फ्लाईओवर के निचले हिस्से के साथ ऊपर की जगहों पर भी लोगों ने डेरा डाल दिया है।

वहीं, बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि उनके पास खाने-पीने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। बाढ़ आने पर आनन-फानन में बेघर होना पड़ा। साथ में जरूरत का सामान भी नहीं ला सके। बस किसी तरह जान बचाकर सड़क किनारे तक पहुंच गए। प्रशासन की तरफ से गांव खाली कराने के लिए समय पर राहत और बचाव टीमें नहीं आईं। ऐसे में कई मवेशी यमुना में डूबने से मर गए। प्रशासन की ओर से लगाए गए टेंट बारिश से राहत दिलाने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। बारिश आते ही कुछ टेंट टपकने भी लगते हैं।
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नहीं मान रहे लोग : बाढ़ से प्रभावित कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें खुद की जान की नहीं बल्कि यमुना की चपेट में आ चुके सामान की परवाह है। प्रशासन की ओर से बार-बार मना करने के बावजूद वे नाव पर सवार होकर गहरे पानी में सामान ढूंढ रहे हैं। ओल्ड उत्मानपुर में मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि यमुना से जितना हो सके दूर रहें लेकिन लोग सामान के पीछे पड़े हुए हैं। पुराने रेलवे ब्रिज के पास टेंट में रह रहे विजय कुमार ने बताया कि यमुना की बाढ़ ने बेघर कर दिया है। परिवार के पास कुछ भी नहीं बचा है। वहीं, ओल्ड उस्मानपुर निवासी कपिल चौधरी ने बताया कि परिवार बेघर हो गया। 

वे लोगों से मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि किसी तरह सामान मिल जाए और कुछ दिन ठीक से गुजर बसर हो जाए। गढ़ी मांडू में रहने वाले मजदूर शहजाद ने बताया कि परिवार के साथ किराए के मकान में रह रहा था। सारा सामान यमुना में डूब चुका है।

बाढ़ देखने के लिए जुट रही भीड़ : कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बाढ़ देखने के लिए आ रहे हैं। यमुना खादर, ओल्ड उस्मानपुर, गढ़ी मांडू, सोनिया विहार समेत अन्य जगहों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। लोग यमुना किनारे तस्वीर लेकर वीडियो भी बना रहे हैं। 

गढ़ी मांडू : जो समान हाथ में आया, उसे ही लेकर निकल पड़े
गढ़ी मांडू निवासी बेली ने बताया कि सुबह करीब 4.30 बजे बाहर से चिल्लाने की आवाज आई। उठकर देखा तो घर में पानी भरने लगा था, लेकिन बाहर जाकर देखा तो पड़ोस में रहने वाले नूर मोहम्मद अपना सामान निकाल रहे थे। पति और तीनों बेटियों के साथ सामान समेटना शुरू किया, जो सामान हाथ आया उसे लेकर निकल पड़े। 

गढ़ी मांडू में 22 साल से रह रहे विजय ने बताया कि बुधवार रात जागने में ही बीत गई। सुबह देखा कि बाढ़ के पानी से डूब चुका है। उन्होंने जल्दी से उठकर घर वालों के साथ बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन पानी अधिक होने की वजह से वह बाहर ही नहीं निकल पाए। इसके बाद काफी देर तक मदद की गुहार लगाई। तब गांव के लोग नाव लेकर आए। उन्हीं की मदद से वह इस भयावह बाहर निकल पाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ आई और हमारा सारा सामान बहाकर ले गई। कुछ सामान घर के अंदर ही बंद पड़ा है। संवाद

चार इंजन की सरकार विफल : आप
आप के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि चार इंजन वाली भाजपा सरकार दिल्ली को राहत देने में पूरी तरह विफल रही है। शिविर पानी में डूब गए। दवाइयों का इंतजाम नहीं है। केजरीवाल सरकार में जब-जब यमुना का जलस्तर बढ़ा तो समय रहते मुनादी करवाकर कैंप लगाए गए और खानपान व दवा की व्यवस्था की गई। खुद मुख्यमंत्री और मंत्री मौके पर पहुंचते थे लेकिन आज भाजपा सरकार गरीबों के सिर से छत छीनकर उन्हें बाढ़ में बेसहारा छोड़ रही है। 2023 में बाढ़ के समय एलजी लगातार सड़कों पर उतरकर वीडियो बनवाते थे और मुख्यमंत्री से सवाल करते थे लेकिन इस बार वे कहीं नजर नहीं आ रहे।

राहत कैंपों में भी पानी घुसा सरकार विफल : कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने भाजपा सरकार पर बाढ़ प्रबंधन में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया है। बृहस्पतिवार को उन्होंने कहा कि यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और राजधानी डूबने की कगार पर है लेकिन सरकार के इंतजाम नाममात्र के हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगाए गए राहत कैंप भी पानी में डूबे हैं। इनमें भोजन, दवाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं नदारद हैं।

कांग्रेस ने 31 अगस्त को बाढ़ की रोकथाम के संबंध में सरकार की तैयारी नाकाफी होने की चेतावनी दी थी लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे नजरअंदाज कर दिया। हजारों लोग बेहाल हैं और सरकार सिर्फ कैमरों के सामने राहत कार्य दिखाने तक सीमित है। बदरपुर खादर, गढ़ी मांडू, उस्मानपुर, जमुना बाजार, निगम बोध घाट, मोनेस्ट्री, आईएसबीटी, विश्वकर्मा कॉलोनी, आईटीओ, दिल्ली सचिवालय और कालिंदी कुंज सहित कई इलाके डूब चुके हैं। भाजपा सरकार 2023 में केजरीवाल सरकार की तरह ही विफल रही है। 

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यमुना नदी का जलस्तर दिनभर में 5 सेमी ही घटा

आईएसबीटी कश्मीरी गेट, सिविल लाइंस और यमुना बाजार में बाढ़ का 4 से 10 फीट तक पानी भर गया है। यमुना बाजार की हालत सबसे ज्यादा खराब है। इसके अलावा कई और कॉलोनियों में भी सीवर ओवरफ्लो हो रहे हैं। हालांकि, राहत की बात ये है कि यमुना का पानी धीमा ही सही लेकिन कम होना शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को यमुना का जलस्तर करीब 5 सेमी नीचे चला गया।

यमुना के पास आउटर रिंग रोड को पार कर बाढ़ का पानी बेला रोड सिविल लाइंस की रिहायशी कॉलोनियों को भी आगोश में ले चुका है। पूरी कॉलोनी में सन्नाटा पसरा है। अधिकतर घरों से निकलकर लोगों ने सुरक्षित जगहों पर शरण ली है। 

कॉलोनी में करीब चार फीट तक पानी भरा हुआ है। यमुना बाजार पहले दिन से डूबने लगा था बृहस्पतिवार को यहां करीब 7 फीट तक पानी भर गया। यहां बनाए गए राहत शिविरों को भी दूसरी जगह पर शिफ्ट कर दिया गया है। 

यमुना का वेग ज्यादा, घटने की गति धीमी
यमुना का वेग अभी बहुत ज्यादा है और पानी घटने की गति धीमी है। वजीराबाद से ओखला बैराज तक यमुना का डाउन स्ट्रीम क्षेत्र माना जाता है। मौजूदा समय हथिनीकुंड बैराज से करीब 1.5 लाख क्यूसेक पानी हर घंटे छोड़ा जा रहा है जबकि दिल्ली में वजीराबाद और ओखला बैराज से करीब 2 लाख क्यूसेक पानी हर घंटे बाहर निकल रहा है इसलिए पानी की गति दिल्ली में बहुत ज्यादा है। पानी तेजी से आगे बढ़ रहा है। 

सीवर ओवर फ्लो की बढ़ रही समस्या
जलस्तर बढ़ने के कारण दिल्ली में यमुना में गिरने वाले नालों को एहतियातन बंद कर दिया गया है। अब स्थिति ये है कि घरों से और लगातार हो रही बारिश से निकलने वाला शहर का पानी निचले इलाकों में सीवर से ओवरफ्लो होने लगा है। यदि बाढ़ की स्थिति इसी तरह  बनी रही तो दिल्ली के रिहायशी इलाके डूबने शुरू हो जाएंगे। 

सबसे अधिक जलस्तर 
बृहस्पतिवार को सुबह 7 बजे इस सीजन का सबसे अधिक जलस्तर 207.48 मीटर दर्ज किया गया जो शाम पांच बजे तक 207.43 मीटर रह गया। राहत की बात ये रही कि दिन में पानी नहीं बढ़ा।
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