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Delhi Flood: क्या वाकई दिल्ली में आई बाढ़ हरियाणा की साजिश? हथिनीकुंड बैराज ने ही डुबोई राजधानी? जानें हर जवाब

Mon, 17 Jul 2023 11:17 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अमर उजाला डिजिटल की टीम ने दिल्ली में आई बाढ़ को लेकर तमाम सवालों के जवाब के लिए हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर सतबीर सिंह कादियान से बातचीत की। उन्होंने बताया कि दिल्ली में बाढ़ कैसी आई और इसके पीछे क्या मुख्य कारण रहे।
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चीफ इंजीनियर सतबीर सिंह कादियान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में यमुना के पानी में उफान के बीच सियासी घमासन बढ़ गया है। पानी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा ने दिल्ली में आई बाढ़ का मुख्य कारण भ्रष्टाचार बताया है ना कि हथनीकुंड का पानी। भाजपा ने कहा कि है दिल्ली सरकार के इस भ्रष्टाचार की न्यायिक जांच होनी चाहिए। वहीं आम आदमी पार्टी हथनीकुंड बैराज से छोड़े गये पानी को दिल्ली के प्रति गहरी साजिश बता रही है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी हुई है। यहां भी लोग दो हिस्सों में बंटे दिखाए दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि दिल्ली में बाढ़ के लिए साजिश रची गई। इसके लिए अमर उजाला डिजिटल की टीम ने हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर सतबीर सिंह कादियान से बातचीत की। आइए जानते हैं क्या सच में दिल्ली में बाढ़ किसी साजिश का हिस्सा है? क्या दिल्ली में आई बाढ़ का कारण हथिनीकुंड बैराज था? अगर ये सब नहीं तो सच्चाई क्या है।

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दिल्ली में बाढ़ क्यों आई? 
दिल्ली में बाढ़ क्यों आई? इस सवाल पर सतबीर सिंह कादियान ने कहा कि दिल्ली में बाढ़ आना प्रकृति का प्रकोप है। उन्होंने बताया कि हथिनीकुंड बैराज डायवर्जन स्ट्रक्चर है। यानी यहां पर पानी रोका नहीं जा सकता है। जो पानी यमुना में आएगा वह पानी स्वतः दिल्ली जाएगा। 

यहां विस्तार से जानिए दिल्ली में आई बाढ़ की वजह हरियाणा सरकार के चीफ इंजीनियर सतबीर सिंह कादियान से

यमुना का पानी दिल्ली के साथ दो नहरों में भी जाता
चीफ इंजीनियर सतबीर सिंह ने बताया कि हरियाणा में यमुना से दो नहरें निकलती हैं, पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर और बीच में है बैराज है। पानी सीधा आ रहा है बैराज तक पहुंच रहा है। इसके बाद सीमित मात्रा में पश्चिमी यमुना नहर हरियाणा और दिल्ली पानी लेकर जाती है। दूसरी तरफ पूर्वी यमुना नहर यूपी पानी लेकर जाती है, इसकी क्षमता छह हजार क्यूसेक है। पश्चिमी यमुना नहर की क्षमता 18 हजार क्यूसेक है, इसको भविष्य में रिवाइज करेंगे। 

हथिनीकुंड से पानी छोड़े जाने की वजह
सतबीर सिंह ने बताया कि आज की तारीख में पश्चिमी यमुना नहर साढ़े 13 से 14 हजार क्यूसेक अधिकतम पानी ले जा सकती है। वहीं पूर्वी यमुना नहर अधिकतम चार हजार क्यूसेक पानी ले जा सकती है। मान लें अगर नदी में एक लाख क्यूसेक पानी आ गया तो उसमें से 14 हजार क्यूसेक पानी एक नहर और चार हजार क्यूसेक पानी दूसरी नहर में चला जाएगा। इसके बाद भी बचा हुआ करीब 82 हजार क्यूसेक पानी तब भी दिल्ली ही जाएगा। जबकि एक लाख क्यूसेक पानी तीन चैनलों में चल रहा होगा, यानी दोनों नहरों और यमुना नदी में। 

2023 में लिया गया था ये निर्णय
बातचीत के दौरान चीफ इंजीनियर सतबीर सिंह ने बताया कि मई 2023 में एक निर्णय लिया गया, जिसमें तय हुआ कि जब पानी यमुना नदी में पानी एक लाख क्यूसेक की मात्रा को पार कर जाएगा तो इन दोनों नहरों को बंद कर दिया जाएगा। इसकी तकनीकी वजह यह है कि यमुना पूरे भारत वर्ष में सबसे ज्यादा सिल्ट यानी गाद वाली नदी है। अगर यमुना में पानी की मात्रा एक लाख क्यूसेक के पार होने के बाद भी नहर को चलाया जाएगा तो नहर गाद और बड़े पत्थर आने से बंद हो जाएंगी। यह पानी पीछे से जो आता है स्वतः आगे जाता है। पहले भी पानी ऐसे ही जाता रहा है। पहले भी परिस्थितियां ऐसी ही थीं और आगे भी रहेंगी। 

दिल्ली में बाढ़ की वजह को समझें
अब बात दिल्ली की करें तो हथिनीकुंड बैराज से लेकर दिल्ली में जो वजीराबाद बैराज है उसकी दूरी लगभग 228 किलोमीटर है। इसमें यमुना के अंदर बहुत सा पानी जमीन में भी चला जाता है और वष्पीकृत भी हो जाता है। करीब 30 प्रतिशत घटकर दिल्ली पहुंचता है। इसके बाद वजीराबाद के बाद जो अगला पड़ाव आता है वह आईटीओ है। सतबीर सिंह ने आगे बताया कि आईटीओ एक ब्रिज है, जिसमें 32 गेट लगे हुए हैं। इसमें से पांच गेट बंद रहे और 28 चालू रहे। जो पानी वजीराबाद बैराज से आया वह आईटीओ से होते हुए ओखला और उसके बाद आगरा नहर में चला जाता है। अगर यहां फ्लो सामान्य हो तो बाढ़ की स्थिति नहीं बन सकती। 
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पिछले साल 2019 में साढ़े आठ लाख क्यूसेक पानी को बहुत आसानी से निकल दिया गया था। इस बार ऐसा क्या हुआ कि साढ़े तीन लाख क्यूसेक के करीब पानी आया और बाढ़ का कारण बन गया। इसका मुख्य कारण यमुना की धारा वाले इलाके में अतिक्रमण वो आबादी या गाद की वजह से हो सकता है। दूसरा कारण यह हो सकता है कि वजीराबाद बैराज और आईटीओ के बीच में लगभग 12 ड्रेन हैं जो यमुना में गिरते हैं। संभव है कि यमुना में बढ़े स्तर की वजह से पानी ड्रेन से होते हुए शहर में फैल गया। जिससे बाढ़ की स्थिति बनी।
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