दिल्ली के 142 गांवों में गेहूं, सरसों, गोभी और आलू सहित नहर से लगते गांवों में धान की पैदावार होती है। इस बजट में खाली और बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा के लिए प्रावधान किसानों के लिए बड़ी सौगात है।
गांव ईसापुर के किसान वीरेन्द्र डागर ने बजट किसानों के लिए बेहद अच्छा बताया है। उन्होंने कहा कि 142 गांवों में से 47 गांव ग्रीन बेल्ट में हैं जबकि 95 गांवों में आर जोन के तहत खेती होती है। पीएम कुसुम योजना से किसानों की केरोसिन और डीजल पर निर्भरता न केवल खत्म होगी, बल्कि कमाई का जरिया भी होगा।
गांव ढासा के किसान राज सिंह का कहना है कि अभी भी दिल्ली के अधिकतर गांवों में पानी की किल्लत है, जबकि भूजल स्तर के लगातार गिरने से उनमें खारापन बढ़ चुका है। किसान इस पानी का खेती में उपयोग नहीं कर सकते हैं, लेकिन हरियाणा से आने वाले ढासा माइनर का पानी दिल्ली खासकर नजफगढ़ और आसपास के गांवों को मिलना चाहिए।
बजट प्रावधान के तहत किसान अब केवल अन्नदाता ही नहीं, ऊर्जा दाता भी बनेंगे। दिल्ली के 142 गांवों में से करीब 25-30 गांवों की जमीन आंशिक तौर पर बंजर या खाली है।
इन गांवों के पंप सेट को सौर ऊर्जा से जोड़ने का भी किसानों को काफी फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि बिजली की बिक्री से गांवों के किसान समूहों की सालाना आय में लाखों की बढ़ोतरी होगी।
किसान क्रेडिट कार्ड, किसान उड़ान योजना, कुसुम योजना, पीएम किसान योजना, मनरेगा के तहत खेती को प्रोत्साहन, एक उत्पाद एक जिला पर फोकस, पानी की कमी दूर करने सहित जैविक उर्वरकों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देने से किसानों की जिंदगी खुशहाल होगी।
खेती में तकनीकी बदलाव और पंचायत स्तर पर वेयर हाउस बनाए जाने से भी फसलों को मंडियों तक भेजने से पहले रखरखाव करना आसान होगा। बजट प्रावधान के लागू होने से दिल्ली के किसानों की सालाना आय में करोड़ों की बढ़ोतरी होगी