किसानों को गेहूं के लिए तय 1925 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी की बजाय 1400-1500 रुपये की दर पर बेचना पड़ा। मजबूरी में किसानों के पास आढ़तियों को बेचने के अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं। सरसों के लिए एमएसपी 4450 रुपये तय था , जबकि इससे करीब 1000 रुपये के नुकसान पर किसानों ने 3500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री की। बाजरा में भी 2150 की बजाय किसानों को महज 1200 रुपये में संतोष करना पड़ा।
प्रमुख फसलें:
गेहूं, ज्वार, बाजरा, सरसों और धान सहित सब्जियों की पैदावार होती है।
दिल्ली के किसान सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचे पहुंचे किसानों को मेहमान की तरह देख रहे हैं। राशन या अपने घरों में जरूरी सामान, हर जरूरत पूरी की जा रही है। आंदोलनकारियों में महिलाएं और बच्चे हैं तो उन्हें कोई परेशानी न आए, आसपास के गांवों में रहने वाले पूरा ध्यान रख रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन, दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र डागर के मुताबिक, दिल्ली के किसानों की तरफ से आंदोलन को पूरा समर्थन है। किसी भी तरह की जरूरत पर उनकी मदद की जा रही है। नहाने, खाने या पानी सहित तमाम तरह की परेशानियों में किसान एकजुट हैं।
कांग्रेस की किसान सेल के प्रभारी सुरेंद्र सोलंकी का कहना है कि इस आंदोलन में उनका समर्थन हैं, हालांकि सीमाओं पर साथ नहीं जा रहे हैं। सरकार को किसानों की मांगों पर गौर करते हुए दिल्ली समेत पूरे देश के किसानों को एमएसपी का लाभ देना चाहिए। कृषि कानूनों को रद्द किया जाना चाहिए ताकि किसानों को राहत मिल सके।