दिल्ली में लंबे समय से चली आ रही कूड़ा प्रबंधन की समस्या को हल करने के लिए उपराज्यपाल की ओर से एमसीडी के आयुक्त को वित्तीय अधिकार देने से दो योजनाओं को पंख लगेंगे। एक योजना से कूड़े का निपटान ही नहीं होगा, बल्कि उससे बिजली भी बनेगी। इस तरह एक ओर कूड़े की समस्या दूर होगी वहीं दूसरी ओर बिजली की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
3000 मीट्रिक टन सॉलिड वेस्ट से ऊर्जा उत्पादन संयंत्र स्थापित होगा
नरेला-बवाना में प्रस्तावित 3000 मीट्रिक टन क्षमता वाले सॉलिड वेस्ट से ऊर्जा उत्पादन संयंत्र की योजना को अब अंततः हरी झंडी मिल जाएगी। यह संयंत्र ठोस कचरे को प्रोसेस कर उससे बिजली का उत्पादन करेगा, जो एक स्वच्छ और सतत ऊर्जा स्रोत साबित होगा। इस परियोजना का बजट लगभग 600 करोड़ रुपये रखा गया है और इसके पूरा होने पर नरेला-बवाना क्षेत्र के साथ-साथ पूरे दिल्ली शहर को कचरे के निपटान में काफी मदद मिलेगी। इस संयंत्र के माध्यम से न केवल कूड़े की समस्या का समाधान होगा, बल्कि इससे उत्पादित ऊर्जा को भी शहर की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।