बजट और लाभार्थियों के आंकड़े
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक दिल्ली सरकार का बिजली सब्सिडी के लिए आवंटन 4,037.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। मौजूदा वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए सरकार ने इस उद्देश्य हेतु 3,500 करोड़ रुपये का बजट रखा है। पिछले दशक में दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो वर्तमान में 73 लाख से अधिक हो चुकी है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में 73 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से लगभग 84 प्रतिशत (52.3 लाख) ने बिजली सब्सिडी का लाभ उठाया, जो 2025-26 में बढ़कर 87 प्रतिशत (55 लाख) हो गया।
क्या है सब्सिडी का मौजूदा प्रावधान?
दिल्ली सरकार की इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को प्रति माह 200 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाती है। वहीं, 201 से 400 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं को प्रति माह 50 प्रतिशत (अधिकतम 800 रुपये तक) सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह बिजली सब्सिडी योजना दिल्ली की विभिन्न डिस्कॉम (जैसे- बीएसईएस राजधानी, बीएसईएस यमुना, टाटा पावर टीपीडीडीएल), एनडीएमसी और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (एमईएस) के माध्यम से उनके संबंधित क्षेत्रों में संचालित की जाती है।
आधार अधिनियम के तहत अनिवार्य नियम
ऊर्जा विभाग की अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली सरकार ने सब्सिडी लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थी की पहचान स्थापित करना उचित समझा है, जिसके तहत लाभार्थी को एक वैध आधार नंबर होने का प्रमाण देना होगा।
आधार का उपयोग ही क्यों?
आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 के तहत, दिल्ली के उपराज्यपाल ने अधिसूचित किया है कि योजना का लाभ उठाने के लिए व्यक्तियों को वेब पोर्टल या सरकार द्वारा तय किए गए अन्य माध्यमों पर अपना आधार नंबर देना होगा। जिन उपभोक्ताओं के पास दिल्ली में आधार नामांकन नहीं है, उन्हें इसके लिए आवेदन करना होगा और 14 अंकों की नामांकन आईडी संख्या के साथ सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आवश्यक विवरण जमा करना होगा। सरकार का मानना है कि आधार नंबर के उपयोग से पहचान स्थापित करना आसान होगा, दस्तावेजों की बहुलता खत्म होगी और प्रक्रिया में पारदर्शिता व दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।