दिल्ली विधानसभा चुनाव में महिलाओं को लुभाने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने घोषणाओं की झड़ी लगा दी है। लेकिन महिलाओं को टिकट देने में प्रमुख राजनीतिक दल महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) की छाप नहीं छोड़ पाए। इसमें महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। विधानसभा की 70 सीटों पर आम आदमी पार्टी (आप) ने नौ (12.86), भाजपा ने आठ (11.43 प्रतिशत) और कांग्रेस ने नौ (12.86 प्रतिशत) महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इनमें शालीमार बाग, कालकाजी, वजीरपुर, नजफगढ़, रोहतास नगर सीट तीन प्रमुख पार्टियों में दो की महिला उम्मीदवार आमने-सामने हैं। शालीमार बाग में लगातार तीसरी बार बंदना कुमारी और रेखा गुप्ता आमने सामने होंगी।
2020 के चुनाव में आप ने आठ, भाजपा ने चार और कांग्रेस ने 10 महिलाओं को टिकट दिया था। इनमें आप की सभी महिला उम्मीदवार जीतकर विधानसभा पहुंची थीं। दिल्ली में 71.73 लाख महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए दलों ने महिलाओं के लिए कई घोषणाएं की हैं। आप ने महिला सम्मान योजना के तहत हर महिला को 2100 रुपये प्रतिमाह देने और दिल्ली की बसों में मुफ्त यात्रा योजना जारी रखने का वादा किया है।
भाजपा ने महिला समृद्धि योजना के तहत गरीब महिलाओं को 2500 रुपये प्रतिमाह, विधवा महिलाओं को 3000 रुपये प्रतिमाह और गर्भवती महिलाओं को छह माह की पोषण किट के साथ 21,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। कांग्रेस ने प्यारी दीदी योजना के तहत दिल्ली की सभी महिलाओं को 2500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया है। महिलाओं को लुभाने के लिए योजनाएं और घोषणाएं तो बहुत की गई हैं, लेकिन राजधानी में 71.73 लाख महिला मतदाता होने के बावजूद दलों ने उन्हें टिकट देने में कंजूसी दिखाई है।
कांग्रेस ने खड़े किए सबसे अधिक महिला उम्मीदवार
1993 में कांग्रेस ने छह, भाजपा ने छह महिलाओं को मैदान में उतारा था। 1998 में कांग्रेस ने 10 और भाजपा ने पांच महिलाओं को चुनाव में उतारा। 2003 के चुनाव में कांग्रेस ने 11 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया, जो अब तक सबसे ज्यादा है। इसी चुनाव में भाजपा ने छह महिलाओं को टिकट दिया था। 2008 और 2013 में कांग्रेस ने छह-छह तो भाजपा ने क्रमशः चार और पांच महिला उम्मीदवारों को चुना था। वर्ष-2015 में कांग्रेस पांच और भाजपा ने आठ महिलाओं को प्रत्याशी बनाया था। दिल्ली विधानसभा में पिछले 17 साल से एक भी भाजपा महिला विधायक नहीं हैं।
22 साल से भाजपा, 17 साल से कांग्रेसी से महिला विधायक नहीं
भाजपा वर्ष 2003 के बाद से 2008, 2013 और 2015 के चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार को जीत नसीब नहीं हुई है। कांग्रेस की बात करें तो 1993 से लेकर 2008 तक के चुनाव में हर बार महिला कांग्रेसी विधायक सदन में नजर आई हैं, लेकिन 2013 के चुनाव में आप की एंट्री होने के बाद कांग्रेस की महिला प्रत्याशियों को जीत नहीं मिली। जबकि 2013 से लेकर अब तक विधानसभा में आप की ही महिला विधायक दिखाई दी हैं। 2013 में तीन और 2015 में छह आप की महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी।
वर्ष प्रत्याशी महिला जीतीं
1993 1316 59 3
1998 758 61 9
2003 739 63 7
2008 794 81 3
2013 731 71 3
2015 673 66 3
2020 672 79 6