विवाह के सात फेरों में लिए गए वचन जीवनभर निभाने की कसम हर कोई खाता है, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में 11 ऐसी महिलाएं हैं जो इन कसमों को न केवल निभा रही हैं, बल्कि अपने पतियों को सत्ता तक पहुंचाने के लिए किसी योद्धा की भांति काम कर रही हैं। यह कोई साधारण समर्थन नहीं, बल्कि चुनावी रणभूमि में पूरी तरह कूदकर अपने पतियों के लिए विजय अभियान छेड़ने की कहानी है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में जहां सभी 249 एमसीडी पार्षद अपने-अपने दल के प्रत्याशियों के लिए जुटे हैं, वहीं 11 महिला पार्षद अपने पति को जीत दिलाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। वहीं एक महिला पार्षद की सास भी चुनावी मैदान में हैं और वह अपनी सास को जिताने के लिए पूरी तरह से सक्रिय हैं। दरअसल इन महिला पार्षदों के लिए यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि पारिवारिक प्रतिष्ठा और राजनीतिक महत्वाकांक्षा की लड़ाई भी है। वे अपने घर-गृहस्थी और पार्षद पद की जिम्मेदारियों को छोड़कर सुबह से देर रात तक अपने पति के पक्ष में प्रचार में जुटी हैं।
नुक्कड़ सभाओं में भाषण देना, पदयात्राएं करना, मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क साधना और चुनावी नारों की गूंज बढ़ाना आदि इनका प्रतिदिन का कार्य हो गया है। इन महिलाओं का समर्पण केवल भाषणों तक सीमित नहीं है। वे पूरी रणनीति तैयार कर रही हैं। विपक्ष की चालों का जवाब दे रही हैं और चुनाव प्रचार के लिए टीम तैयार कर रही हैं। ओखला सीट पर भाजपा की महिला पार्षद के पति और कांग्रेस की महिला पार्षद आमने-सामने हैं तो राजौरी गार्डन में एक महिला पार्षद अपनी सास के लिए मैदान में डटी हुई हैं।
परिवार से ज्यादा राजनीति को प्राथमिकता
इन महिला पार्षदों ने चुनावी माहौल में घर की जिम्मेदारियों को लगभग त्याग दिया है। बच्चों की देखभाल से लेकर घरेलू कार्य तक सब कुछ फिलहाल दूसरों के भरोसे छोड़ दिया गया है। उनका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ अपने पति या सास को जीत दिलाने पर केंद्रित है। यह चुनाव उनके लिए एक व्यक्तिगत लड़ाई भी है, जिसमें वे किसी भी तरह से पीछे नहीं हटना चाहतीं।
महिलाओं की राजनीति में बढ़ती भागीदारी
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और ये महिला पार्षद इस बदलाव की एक मिसाल बन रही हैं। वे न केवल खुद एमसीडी पार्षद के रूप में काम कर रही हैं, बल्कि अपने पतियों के विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए भी पूरी तरह समर्पित हैं। उनकी मेहनत और संघर्ष का परिणाम क्या होगा, यह तो चुनावी नतीजे ही बताएंगे, लेकिन इनकी अटूट वफादारी और संकल्प शक्ति की चर्चा हर तरफ हो रही है।
महिला पार्षदों के परिजनों के चुनाव लड़ने का ब्यौरा..
- बादली में भाजपा पार्षद गायत्री यादव के पति दीपक चौधरी
- मुंडका में आप पार्षद मनीषा कराला के पति जसबीर कराला
- राजौरी गार्डन में आप पार्षद मीनाक्षी चंदेला की सास धनवती चंदेला
- मादीपुर में भाजपा पार्षद उर्मिला गंगवाल के पति कैलाश गंगवाल
- हरीनगर में आप पार्षद मंजू सेतिया के पति सुरेंद्र सेतिया
- नजफगढ़ में आप पार्षद मीना यादव के पति तरूण कुमार
- बिजवासन में आप पार्षद पूनम भारद्वाज के पति सुरेंद्र भारद्वाज
- कस्तुरबा नगर में आप पार्षद कुसुम लता के पति रमेश पहलवान
- महरौली में आप पार्षद रेखा के पति महेंद्र चौधरी
- ओखला में भाजपा पार्षद नीतू के पति मनीष चौधरी
- सीलमपुर में आप पार्षद शुगुफ्ता चौधरी के पति जुबैर चौधरी
- घोंडा में आप पार्षद छाया के पति गौरव शर्मा