राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। ये मेट्रो स्टेशन, बस अड्डे के पास बीच सड़क पर खड़े रहते हैं। इससे ट्रैफिक रुकता चला जाता है और जाम लग जाता है। इसके अलावा जब तक ये यात्रियों से पूरी तरह भर नहीं जाते, इनके चालक इन्हें लेकर जाते नहीं हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की स्टडी में ये बात सामने आई है।
दिल्ली में इस साल एक जनवरी से 15 मई तक ई-रिक्शा के सबसे ज्यादा चालान अवैध पार्किंग के 25743 किए गए हैं। इसके बाद दूसरे सबसे ज्यादा चालान प्रतिबंधित सड़कों पर चलने के 14045 किए गए हैं। खतरनाक होती स्थिति को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली में ई-रिक्शा की संख्या को नियंत्रित व विनियमित करके के लिए व्यापक नीति बनाने के संबंध में एक प्रस्ताव दिल्ली सरकार को हाल ही में भेजा है।
दिल्ली में ई-रिक्शा का संचालन वर्ष 2011 में राष्ट्रमंडल खेलों की समाप्ति के बाद किया गया था। छोटी दूरी तक यात्रियों को ले जाने का ई-रिक्शा महत्वपूर्ण साधन है। हालांकि बीच सड़क पर खड़े होने से लगने वाले ट्रैफिक जाम, ई-रिक्शा के डिजाइन का दोषपूर्ण होना, ई-रिक्शा को गैर-लाईसेंसधारी, अप्रशिक्षित, नाबालिगों के चलाने की वजह से यह यह सवारी खतरनाक भी होती जा रही है।
ये लालबत्ती को भी जंप कर देते हैं। साथ ही इनकी बैटरी अवैध रूप से चार्ज की जाती है। दिल्ली हाईकोर्ट एक आदेश पारित कर चुका है कि अपंजीकृत ई-रिक्शा को चलाना अवैध है। वहीं दिल्ली सरकार ने 236 जगहों पर ही ई-रिक्शा को चलने की अनुमति दी है।